नई दिल्ली: रिलायंस ग्रुप की रिटेल कंपनी रिलायंस रिटेल और 7-Eleven भारत में अपनी पांच साल पुरानी फ्रेंचाइजी डील खत्म करने जा रही हैं। इस पार्टनरशिप के तहत चलाए जा रहे लगभग 60 कन्वीनियंस स्टोर में से ज्यादातर को बंद किया जा रहा है। इसकी वजह यह है कि यह फॉर्मेट लगातार घाटे में चल रहा था। ईटी की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि कुछ आउटलेट बंद होने से पहले अपना स्टॉक खत्म कर रहे हैं। 7-Eleven भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए किसी दूसरे भारतीय पार्टनर की तलाश कर सकती है। हालांकि अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। इससे भारत में कन्वीनियंस स्टोरके सामने आ रही मुश्किलों का पता चलता है। देश में लाखों छोटे किराना स्टोर हैं। साथ ही क्विक-कॉमर्स कंपनियां भी मिनटों में सामान घर पहुंचा रही हैं।
ब्रांडेड स्टोर चलाने की लागत
इस बारे में रिलायंस और 7-Eleven ने सवालों का जवाब नहीं दिया। रिलायंस और 7-Eleven ने 2021 में हाथ मिलाया था। इस पार्टनरशिप का मकसद रिटेल नेटवर्क के जरिए दुनिया की सबसे बड़ी कन्वीनियंस-स्टोर चेन को भारत में लाना था। लेकिन बिजनेस उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। इसकी वजह यह थी कि ब्रांडेड स्टोर चलाने में ज्यादा लागत आती है।
फाइनेंशियल स्टेटमेंट के अनुसार, 7-India कन्वीनियंस रिटेल वेंचर ने मार्च 2026 को खत्म हुए साल में लगभग ₹92 करोड़ ($10.6 मिलियन) का रेवेन्यू और लगभग ₹90 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया। 7-Eleven की जापानी पैरेंट कंपनी, Seven & i Holdings, दुनिया भर में 85,000 से ज्यादा स्टोर चलाती है।
रिलायंस हर चैनल के जरिए ग्राहकों तक पहुंचना चाहती है, लेकिन आखिर में सस्टेनेबिलिटी मायने रखती है। महामारी के बाद से कन्वीनियंस स्टोर पर क्विक कॉमर्स का दबाव बढ़ा है, क्योंकि दोनों ही फॉर्मेट एक जैसे सामान बेचते हैं और तुरंत जरूरत वाली चीजें उपलब्ध कराते हैं।
देवांग्शु दत्ता, फाउंडर और CEO, थर्ड आईसाइट
क्विक कॉमर्स का दबाव
कंज्यूमर-सेक्टर कंसल्टेंसी थर्ड आईसाइट के फाउंडर और CEO देवांग्शु दत्ता ने कहा, "रिलायंस हर चैनल के जरिए ग्राहकों तक पहुंचना चाहती है, लेकिन आखिर में सस्टेनेबिलिटी मायने रखती है। महामारी के बाद से कन्वीनियंस स्टोर पर क्विक कॉमर्स का दबाव बढ़ा है, क्योंकि दोनों ही फॉर्मेट एक जैसे सामान बेचते हैं और तुरंत जरूरत वाली चीजें उपलब्ध कराते हैं।"
उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट द्वारा चलाए जाने वाले कन्वीनियंस स्टोर की तुलना में किराना स्टोर का खर्च बहुत कम होता है और मार्जिन की उम्मीदें भी अलग होती हैं। रिलायंस का इस फॉर्मेट से बाहर निकलना इस बात का संकेत है कि इस पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। दुनिया भर में सुपरमार्केट और हाइपरमार्केट के विस्तार के बावजूद, कई बाजारों में कन्वीनियंस स्टोर मजबूत रिटेल बिजनेस बन गए हैं। लेकिन भारत में ऑर्गनाइज़्ड कन्वीनियंस रिटेल को खास सफलता नहीं मिल पाई है।