भोपाल।मध्य प्रदेश में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी आधारित एक सफल जन-आंदोलन के रूप में पहचान बना चुका है। नदियों, तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन की इस पहल को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है।भोपाल के भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ में छह देशों के राजनयिकों ने मध्य प्रदेश के जल संरक्षण मॉडल की प्रशंसा करते हुए इसे वैश्विक जल संकट के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने अपने-अपने देशों में भी इस मॉडल को लागू करने की इच्छा जताई।
प्रदेश में अब तक 2.12 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि सरकार ने इसे बढ़ाकर 3.66 लाख जल संरचनाओं तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
साइप्रस और फिजी ने बताया अनुकरणीय मॉडल
सात दिवसीय आयोजन में साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने कहा कि जल संकट आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए जन-जागरूकता बेहद आवश्यक है। उन्होंने मध्य प्रदेश की पहल को प्रेरणादायक बताया।
उन्होंने वीर भारत न्यास के साथ संवाद को सार्थक बताते हुए जानकारी दी कि साइप्रस का सांस्कृतिक दल 20-21 जून को भोपाल में प्रस्तुतियां देगा।
फिजी गणराज्य के उच्चायुक्त जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि भारत और फिजी के संबंध 1948 से अत्यंत प्रगाढ़ हैं। भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देश पर्यावरण और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।
मैक्सिको और नेपाल ने साझा जिम्मेदारी पर दिया जोर
मैक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख वनेसा एड्रियन ने जल संरक्षण को वैश्विक साझा जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि जल और नदियों को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना अत्यंत सराहनीय प्रयास है।
नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने कहा कि ऐसा आयोजन प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का बोध कराता है। वहीं त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदत्त सिंह ने इसे वैश्विक सहयोग और साझा जिम्मेदारी का सशक्त संदेश बताया।
इक्वाडोर में भी होगा ‘सदानीरा संगम’
इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जार्ज विनिशियो अनरंगो ने कहा कि मध्य प्रदेश की इस पहल से प्रेरित होकर वे अपने देश में भी जल संरक्षण को समर्पित ‘सदानीरा संगम’ आयोजित करने की दिशा में कार्य करेंगे।



