भोपाल। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) के प्रबंध निदेशक (एमडी) अनुराग दनायक को नोएडा में पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है।
आरोप है कि उसने भोपाल की दवा वितरक फर्म से सर्विस एजेंट अनुबंध के नवीनीकरण, नए सरकारी संस्थानों के आवंटन और दवाओं की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी रिश्वत के रूप में मांगी थी।
ठिकानों से भारी मात्रा में मिली नकदी
बेंगलुरु, नोएडा और जबलपुर स्थित उससे जुड़े ठिकानों पर सर्चिंग की, जिसमें 75 लाख रुपये नकद, चार लाख रुपये कीमत की विदेशी मुद्रा, 697 ग्राम सोना (अनुमानित कीमत 86 लाख रुपये) और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मरामद हुए हैं। सीबीआइ भोपाल ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।
भोपाल की दवा फर्म ने सीबीआइ से की थी शिकायत
एफआइआर के अनुसार भोपाल की मेसर्स फार्मा केयर फर्म के हर्ष कौशिक ने 10 जुलाई को सीबीआइ भोपाल में शिकायत की थी। यह फर्म केएपीएल की अधिकृत सर्विस एजेंट है और मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों व अन्य सरकारी संस्थानों में दवाओं की आपूर्ति करती है। वर्ष 2026-27 के लिए उसके सर्विस एजेंट अनुबंध के नवीनीकरण का आवेदन लंबित था।
कमीशन का 60 प्रतिशत रिश्वत के रूप में मांगा
- शिकायत में बताया कि दनायक फरवरी 2026 से हुई दवा बिक्री पर मिलने वाले कमीशन का 60 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के रूप में मांगा था। इसके अलावा, तीन नए सरकारी संस्थानों में दवा वितरण का कार्य दिलाने और लंबित सर्विस एजेंट एग्रीमेंट को मंजूरी देने के एवज में भी अवैध रकम मांगी गई।
- उसने वाट्सएप काल के माध्यम से कई बार संपर्क कर फर्म को कमीशन की गणना करने और उसमें से अपना हिस्सा देने के लिए कहा। साथ ही चेतावनी दी कि रिश्वत नहीं देने पर अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा, भविष्य में किसी भी सरकारी संस्थान का आवंटन भी नहीं मिलेगा।
पांच लाख रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
आरोपित ने कुल लगभग 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी, पहली किस्त में पांच लाख रुपये लेने पर सहमति जताई। 15 जुलाई को नोएडा में पांच लाख रुपये लेते हुए सीबीआइ टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपित से जुड़े स्थानों से जब्त दस्तावेज गड़बड़ी की और परतें खुलेंगी।



