भोपाल। प्रदेश में छत्तीसगढ़ के रास्ते आए जंगली हाथियों के यहीं पर रहवास बना लेने और मानव हाथी द्वंद्व की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) देहरादून अध्ययन करेगा। बांधवगढ़ और संजय गांधी टाइगर रिजर्व में हाथियों के व्यवहार, आवागमन और आवास का विज्ञानिक अध्ययन करने से उनके संरक्षण की दिशा में कार्य हो सकेगा। तीन वर्षीय अध्ययन योजना पर डब्ल्यूआइआइ और वन विभाग के बीच सहमति बनी है।
अब पहले ही मिल जाएगी हाथियों की लोकेशन
इसमें ऐसा डेटा मॉडल तैयार किया जाएगा, जिससे हाथियों के संभावित मूवमेंट का पूर्वानुमान लगाया जा सके। इससे गांवों को पहले से सतर्क करने, फसलों की सुरक्षा करने और वन्यजीव प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। वर्ष 2018 के बाद से बांधवगढ़ को हाथियों ने स्थायी रूप से अपना ठिकाना बना लिया है।
हाथियों का मूवमेंट बांधवगढ़ तक सीमित न होकर अब संजय गांधी टाइगर रिजर्व, उत्तर एवं दक्षिण शहडोल तथा आसपास के वन क्षेत्रों तक फैल गया है। लगातार बदलते इस व्यवहार को समझने के लिए विज्ञानिक तरीके से डेटा संग्रह और विश्लेषण किया जाएगा।
परियोजना के तहत हाथियों के प्रत्येक मूवमेंट, पसंदीदा आवास, भोजन, विश्राम स्थल और मौसमी गतिविधियों का रिकार्ड तैयार किया जाएगा। विज्ञानिक यह भी अध्ययन करेंगे कि किन क्षेत्रों में मानव हाथी संघर्ष की संभावना अधिक रहती है और ऐसे स्थानों पर भविष्य में किस प्रकार की रणनीति अपनाई जा सकती है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 70 हाथी निवास कर रहे हैं। संजय गांधी टाइगर रिजर्व में 20 हाथियों का समूह है। शहडोल, अनूपपुर के वन क्षेत्रों में भी हाथियों का मूवमेंट रहता है।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को चार माह में गाइडलाइन बनाने के दिए हैं निर्देश
छत्तीसगढ़ से हाथियों के मप्र में प्रवेश को लेकर आए दिन बिगड़ते हालात पर मप्र हाई कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वन्यजीव संरक्षण, विशेषकर मानव हाथी संघर्ष से जुड़े मामलों के लिए राज्य सरकार को विस्तृत गाइडलाइन चार माह में तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि हाथियों को पकड़ना अंतिम विकल्प होना चाहिए। बता दें कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अक्टूबर 2024 में दस हाथियों की मौत विषाक्त कोदो खाने से हो चुकी है। तब भी गाइडलाइन बनाने की बातें हुईं थीं, पर अब तक कुछ नहीं हो सका है।



