Spread the love

भोपाल। एम्स भोपाल की एमडी बायोकैमिस्ट्री छात्रा डा. दीपा रोशनी ने अपने शोध में फैटी लिवर बीमारी की पहचान को लेकर महत्वपूर्ण खोज की है। उनके रिसर्च में एड्रोपिन और आइरिसिन नामक बायोमार्कर को मेटाबोलिक-एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज की शुरुआती पहचान और निगरानी के लिए उपयोगी बताया गया है। यह रिसर्च भविष्य में मरीजों के लिए बिना दर्द और कम खर्च में बीमारी की जांच का रास्ता आसान कर सकती है।

वर्तमान समय में मोटापा, डायबिटीज, गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अभी इस बीमारी की पहचान के लिए लिवर बायोप्सी और महंगी जांचों की जरूरत पड़ती है, जो आम लोगों के लिए आसान नहीं होती। ऐसे में यह शोध काफी अहम माना जा रहा है।रिसर्च में बताया गया है कि एड्रोपिन शरीर में ऊर्जा संतुलन, शुगर और फैट कंट्रोल से जुड़ा है, जबकि आइरिसिन एक्सरसाइज और मेटाबोलिज्म सुधार में मदद करता है। इन दोनों के स्तर में बदलाव से बीमारी का शुरुआती संकेत मिल सकता है। इस शोध से भोपाल और आसपास के लोगों को भविष्य में सस्ती और आसान जांच सुविधा मिलने की उम्मीद है, जिससे समय रहते इलाज शुरू कर गंभीर लिवर बीमारी से बचाव किया जा सकेगा।