ईश्वर नगर, दानापानी रोड में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार को भव्य धार्मिक आयोजन के साथ हुआ।
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भोपाल।ईश्वर नगर, दानापानी रोड में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार को भव्य धार्मिक आयोजन के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से भर दिया।
समापन अवसर पर कथावाचक आचार्य शशांक शेखर महाराज ने श्रीमद्भागवत के अंतिम श्लोक का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य, करुणा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। इसके आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक और समाजोपयोगी बना सकता है।
आचार्य शशांक शेखर महाराज ने कहा कि भागवत कथा का वास्तविक उद्देश्य केवल श्रवण करना नहीं, बल्कि उसके संदेशों को अपने व्यवहार और जीवनचर्या में उतारना है। कथा के उपदेश व्यक्ति को आत्मिक उन्नति के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का भी बोध कराते हैं। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से समाज और राष्ट्रहित में सकारात्मक कार्य करने तथा नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प भी कराया।
कथा पंडाल में पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा। भजन-कीर्तन, जयघोष और संकीर्तन के बीच श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर होकर झूमते और नृत्य करते नजर आए। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने धर्ममय एवं संस्कारयुक्त जीवन जीने का संकल्प लिया।
कथा के पश्चात महाप्रसादी का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और भक्तिमय माहौल बना रहा।
वहीं आयोजन समिति मां वैष्णो देवी दुर्गा समिति की महिलाओं ने अपने जीवन में राधा, रुक्मिणी और सीता के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया तथा भावुक वातावरण के बीच नम आंखों से भागवत जी की विदाई की।