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न्यूयॉर्क: शुक्रवार को भारत ने UN जनरल असेंबली की पहली कमिटी में ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान पर निशाना साधा। भारत ने कहा कि परमाणु हथियारों को ‘शासन चलाने का औजार’ नहीं माना जाना चाहिए। भारत ने जोर देकर कहा कि नई दिल्ली परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगी। निशस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर हुई बैठक में पाकिस्तान की तरफ से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत ने कहा कि भारत की क्षमताएं रक्षात्मक हैं और उसे देश की सुरक्षा जरूरतों के मुताबिक तैयार किया गया है।

भारत का पक्ष रखते हुए जिनेवा में ‘कॉन्फ्रेंस ऑन डिसआर्मामेंट’ में भारत के स्थायी मिशन के सीनियर एडवाइजर (निरस्त्रीकरण) अनमोल शेर सिंह बेदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत टकराव नहीं चाहता लेकिन चेतावनी दी कि गैर-जिम्मेदाराना हरकतों के लिए जवाबदेही न होने से इस इलाके में संकट और बढ़ते हैं।

भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेलिंग पर क्या कहा?

बेदी ने कहा ‘हम मांग करते हैं कि भारत के जिन इलाकों पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा किया गया है उन्हें खाली किया जाए और वापस लौटाया जाए।’ उन्होंने कहा ‘भारत हमेशा शांति के पक्ष में रहा है और सभी के साथ शांति बनाए रखना चाहता है। लेकिन अगर गैर-जिम्मेदाराना हरकतों के लिए कोई जवाबदेही नहीं होती है तो शांति शायद ही संकटों के बीच का कोई ठहराव बन पाती है।’

उन्होंने कहा कि भारत की क्षमताएं ‘बचाव के मकसद से’ हैं और किसी देश के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने तनाव बढ़ने को लेकर चिंताएं सुनीं। ये जायज चिंताएं हैं। हालांकि समय के साथ किए गए कामों से ही इनका सही अंदाजा लगाया जा सकता है। परमाणु हथियारों को शासन-संचालन को आम औजारों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।’ बेदी ने आगे कहा ‘एक ऐसा रुख जो आतंकी/अप्रत्यक्ष गतिविधियों के परिणामों को छिपाने या सीमित करने के लिए परमाणु धमकी का सहारा लेता है वह तनाव के जोखिम को बढ़ाता है न कि संयम की संभावना को।’

भारत ने कहा कि हम शांति चाहते हैं लेकिन अगर सीमा पार से होने वाली आतंकवादी या उकसाने वाली हरकतों का हिसाब नहीं लिया जाएगा तो शांति सिर्फ दो युद्धों या संकटों के बीच की कुछ दिनों की शांति ही रहेगी। यानि भारत ने UN को साफ शब्दों में समझा दिया है कि परमाणु हथियारों को गीदड़ भभकी या ब्लैकमेलिंग का औजार बनाना बंद होना चाहिए। ऐसी धमकियों से तनाव घटता नहीं बल्कि और ज्यादा बढ़ता ही है।