नई दिल्ली: टाटा ग्रुप में मचे घमासान के बीच होल्डिंग कंपनी टाटा संस अपने बिजनेस प्लान को आगे बढ़ाने और पेंडिंग कॉर्पोरेट मामलों पर चर्चा करने के लिए अगले महीने अपनी सालाना आम बैठक (AGM) बुलाने की योजना बना रही है। इन मामलों में एन चंद्रशेखरन की डायरेक्टर के तौर पर दोबारा नियुक्ति भी शामिल है। इसे लेकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के बाकी बोर्ड के बीच मतभेद हैं।
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि अगर सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) पर जारी पाबंदियों की वजह से जरूरी कोरम नहीं बन पाता है, तो टाटा संस नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का रुख कर सकती है। इससे उसे बैठक करने और अपने पेंडिंग बिजनेस को पूरा करने का कानूनी रास्ता मिल जाएगा। यह लागू कॉर्पोरेट कानून के नियमों के मुताबिक होगा। कंपनी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
तीन महीने का एक्सटेंशन
एक एग्जीक्यूटिव ने कहा, ‘टाटा संस को कई मामलों पर तेजी से काम करना होगा, इसलिए जल्द से जल्द AGM होना जरूरी है। ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका खोजने के लिए कानूनी तौर पर मामले की विस्तार से जांच की गई है।’ कंपनी को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से AGM के लिए पहले ही तीन महीने का एक्सटेंशन मिल चुका है। इससे पहले 18 अगस्त को होने वाली बैठक कोरम की कमी के कारण टाल दी गई थी।
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने SRTT पर बैठकें करने या फैसले लेने से जुड़ी पाबंदियां नहीं हटाईं हैं। SRTT और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के पास टाटा संस में मैज्योरिटी स्टेक है। कंपनीज एक्ट की धारा 97(1) के तहत, NCLT के पास AGM बुलाने का निर्देश देने की शक्ति है और ऐसा करते समय वह कंपनी की सामान्य कोरम जरूरतों को दरकिनार कर सकती है।
कोरम की कमी
जानकारों का कहना है कि इससे टाटा संस SRTT-SDTT के नॉमिनी के बिना भी आगे बढ़ सकती है। IPO और वैल्यूएशन एडवाइजरी में विशेषज्ञता रखने वाली फर्म मॉर्फिस मैनेजमेंट सर्विसेज के पार्टनर विमल तापरिया ने कहा, ‘इससे मूल विवाद का समाधान नहीं होगा। प्रभावित शेयरधारक AGM या उसमें पारित प्रस्तावों को चुनौती दे सकते हैं, जिससे बैठक और उसके फैसलों की वैधता को लेकर एक और कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है।"
किस बात पर हुआ था टकराव?
पिछले गुरुवार को हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक में दो अहम मुद्दों एन चंद्रशेखरन की चेयरमैन के तौर पर दोबारा नियुक्ति और कंपनी की लिस्टिंग पर टकराव हुआ था। नोएल टाटा ने इन दोनों का विरोध किया, जबकि अन्य डायरेक्टरों ने इनका समर्थन किया। SDTT के पास टाटा संस की 27.98% और SRTT के पास 23.56% हिस्सेदारी है।



