नई दिल्ली: आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन और दिग्गज उद्योगपति हर्ष गोयनका ने बिस्कुट के मशहूर ब्रांड पारले-जी के बहाने नेताओं पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि पारले-जी के 10 रुपये के पैकेट की तरह संसद में वर्किंग डेज में भी लगातार गिरावट आई है। इस पैकेज का वजन 2008 में 140 ग्राम था जबकि अब इसका वजन आधा यानी 70 ग्राम रह गया है। इसी तरह हाल में संसद सत्र का ज्यादातर समय भी हंगामे की भेंट चढ़ गया और बहुत कम दिन कामकाज हो पाया।
हर्ष गोयनका ने एक्स पर पारले-जी की एक फोटो पोस्ट की है। इसमें बताया गया है कि पारले-जी के 10 रुपये के पैकेट की कीमत में कई साल से कोई बदलाव नहीं हुआ है लेकिन इसका वजन लगातार कम हुआ है। गोयनका ने इसके साथ ही लिखा, ‘Parle और ‘Parlemint’ – दोनों ही सिकुड़ रहे हैं! एक के पैकेट में बिस्कुट कम हो गए हैं, तो दूसरे में काम के दिन!’
पारले-जी का हाल
2008 में पारले-जी के 10 रुपये वाले पैकेट का वजन 140 ग्राम था जो 2011 में घटकर 130 ग्राम रह गया। 2014 में इसका वजन 10 ग्राम कम करके 120 ग्राम कर दिया गया। इसके बाद 2017 में इसका वेट 20 ग्राम कम होकर 100 ग्राम रह गया। 2020 में यह 90 ग्राम का रह गया। 2023 में इसमें फिर कटौती की गई और इसका वजह 80 ग्राम रह गया। इस साल यह 70 ग्राम का रह गया है।
संसद का मॉनसून सत्र
इसी तरह संसद का हालिया मॉनसून सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ गया था। इस दौरान दोनों सदनों में 12 बिल पास हुए। लेकिन चर्चा और कामकाज का बुरा हाल रहा। लोकसभा में केवल 19 फीसदी कामकाज हुआ जबकि राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी 39.17% रही। पूरे सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा टकराव जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन को लेकर रहा।
इस दौरान लोकसभा की 19 बैठकें हुईं। करीब 114 घंटे कार्यवाही होनी थी लेकिन सदन महज 17 घंटे 30 मिनट चला। मतलब 96 घंटे 30 मिनट का समय काम नहीं हो सका। इसी तरह राज्यसभा में भी करीब 114 घंटे काम होना था, लेकिन कार्यवाही लगभग 37 घंटे 20 मिनट ही चली। करीब 76 घंटे 40 मिनट का समय काम नहीं हो पाया।



