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नई दिल्ली: भारत में ऐप टैक्सी इस्तेमाल करने वाले 10 में से 8 लोग ‘डार्क पैटर्न्स’ यानी ऐप की चालबाजियों से परेशान हैं। Local Circles सर्वे में यह बात सामने आई है कि टैक्सी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स (जैसे Ola, Uber आदि) पर यूजर्स को झांसा देना, जबरदस्ती कैंसल करवाना, बार-बार टोकना और ऐप के डिजाइन में हेरफेर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सर्वे में शामिल 59% ऐप टैक्सी यूजर्स का कहना है कि उन्होंने ड्रिप प्राइसिंग’ का सामना किया है। मतलब राइड खत्म होने पर बिल में ऐसे चार्ज जोड़ दिए जाते हैं जिनके बारे में पहले नहीं बताया गया था।