गोवर्धन पूजा प्रसंग और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से भावविभोर हुए श्रद्धालु
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गोवर्धन पूजा प्रसंग और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से भावविभोर हुए श्रद्धालु
भगवान का स्मरण और भक्ति जीवन के सभी संकटों का सरल समाधान : आचार्य शशांक शेखर महाराज
भोपाल, संवाददाता अंकिता राज |
भोपाल। राजधानी के दानापानी रोड स्थित ईश्वर नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में रविवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और मनोहारी वर्णन किया गया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भक्ति रस का आनंद लिया और श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।
कथावाचक आचार्य शशांक शेखर महाराज ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान का स्मरण, नाम संकीर्तन और सच्ची भक्ति जीवन के सभी दुखों, संकटों एवं मानसिक तनावों को दूर करने का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य ईश्वर से जुड़ता है, तब उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं।
कथा के दौरान आचार्य शशांक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए बताया कि उनकी प्रत्येक लीला मानव जीवन के लिए गहन आध्यात्मिक और नैतिक संदेश समेटे हुए है। उन्होंने माखन चोरी, ग्वाल-बालों के साथ क्रीड़ाएं, कालिया नाग मर्दन, पूतना वध, अघासुर एवं बकासुर जैसे दैत्यों के संहार तथा माता यशोदा के वात्सल्य से जुड़े प्रसंगों का सजीव चित्रण किया। उनके भावपूर्ण वर्णन से श्रद्धालु स्वयं को वृंदावन की पावन लीलाओं के बीच अनुभव करने लगे।
गोवर्धन पूजा प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के बढ़ते अहंकार को समाप्त करने और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देने के लिए गोवर्धन पर्वत की पूजा का महत्व स्थापित किया था। जब इंद्र ने क्रोधित होकर ब्रजभूमि पर मूसलाधार वर्षा कराई, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। यह दिव्य लीला दर्शाती है कि ईश्वर सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण, गौ सेवा, सामूहिक एकता और अहंकार त्याग जैसे जीवन मूल्यों को भी स्थापित करता है। आज के समय में इन आदर्शों को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ भजन-कीर्तन में भाग लिया। पूरे कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा एवं आनंद से ओतप्रोत दिखाई दिए।