थिंपू: भारत के इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर नई दिल्ली और भूटान के एक अखबार के बीच बहस छिड़ गई है। इस विवाद की शुरुआत अखबार की रिपोर्ट से हुई जिसमें कहा गया था कि भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने E20 पेट्रोल देने का ऑफर दिया था, जिसे भूटान ने इनकार कर दिया। भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को गलत बताते हुए इसे खारिज कर दिया।
मंत्रालय ने फैक्ट चेक करते हुए एक बयान जारी किया और रिपोर्ट को गलत बताया। बयान में कहा गया कि किसी भी ऑयल मार्केटिंग कंपनी (OMC) ने भूटान को E20 पेट्रोल देने का प्रस्ताव नहीं दिया था। यह भी कहा कि इस तेल के निर्यात को कोई प्रस्ताव औपचारिक रूप से नहीं तैयार किया गया है।
भारत के खंडन के बाद रिपोर्ट का बचाव
भारत के खंडन के बाद भूटानी अखबार के संपादक तेनजिंग लामसांग ने अपनी रिपोर्ट का बचाव किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भूटान के व्यापार विभाग का एक जवाब शेयर किया है। इसमें कहा गया है कि भूटान, भारत से E20 पेट्रोल आयात नहीं कर रहा है। हालांकि, इसमें यह नहीं कहा गया है कि भारत ने ऐसा कोई ऑफर दिया था।
लामसांग ने पत्र के आधार पर किया दावा
लामसांग ने इस पत्र-व्यवहार को आधार बनाकर तर्क दिया है कि यह उनकी अखबार की रिपोर्ट का समर्थन करता है। उन्होंने पत्र को शेयर करते हुए X पर लिखा, भूटान सरकार के व्यापार विभाग का लिखित जवाब देखें। इसमें इस बात की पुष्टि की गई है कि भारतीय OMC की ओर से प्रस्ताव दिया गया था और विभाग ने OMC से सामान्य पेट्रोल की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं सामने आई हैं, जो खासतौर पर पुरानी पेट्रोल गाड़ी रखने वालों ने उठाई हैं। कुछ उपभोक्ताओं ने गाड़ी के माइलेज कम होने और फ्यूल पंप में समस्या के दावे किए हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेडिंग पर्यावरण और सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद है।



