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नई दिल्ली: 15 साल के वंदन अलंकार सवाई ने कुछ ऐसा किया कि पूरी दुनिया हैरान रह गई, और घरवालों को भी इसकी भनक नहीं लगी। वंदन ने ऑनलाइन शतरंज के एक मुकाबले में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हरा दिया। यह वही कार्लसन हैं जिनका नाम शतरंज की दुनिया में लगभग अजेय खिलाड़ियों में लिया जाता है। लेकिन मुकाबला खत्म होने के बाद वंदन ने न कोई जश्न मनाया, न किसी को फोन किया। वह बस अपने कमरे से निकले, मां-पिता से कहा कि उनकी बाजियां खत्म हो गई हैं और फिर आराम करने चले गए।

जब पिता ने देखा रिकॉर्ड तो हुआ खुलासा

असल कहानी बाद में सामने आई। वंदन के पिता ने बेटे का प्रोफाइल खोला और वहां मुकाबलों का रिकॉर्ड देखा। तभी पता चला कि वंदन ने चार में से तीन बाजियां जीती हैं और इनमें से एक जीत मैग्नस कार्लसन के खिलाफ है। परिवार के लिए यह किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं था। मां ने बताया कि बेटे ने जीत का जिक्र तक नहीं किया था। सरदार पटेल विद्यालय में कक्षा 10 के छात्र वंदन ने आठ साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया था। लगातार अभ्यास और कोचों के मार्गदर्शन ने उनके खेल को निखारा।

अनोखी जीत वंदन अलंकार की

सरदार पटेल विद्यालय की कक्षा 10 के छात्र वंदन की शुरुआती प्रतिक्रिया का एक कारण था। उन्हें पहले लगा कि शायद मैग्नस कार्लसन से ऑनलाइन खेलते समय ‘माउस स्लिप’ हो गई होगी, यानी गलती से कोई गलत चाल चल गई होगी। इसलिए नतीजे को लेकर आश्वस्त नहीं थे। वंदन की मां माधुरी बताती हैं, उसे समझ नहीं आ रहा था कि कार्लसन जैसी शख्सियत इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकती है। अगर वंदन को खुद कार्लसन को हराने की उपलब्धि समझने में थोड़ा समय लगा, तो स्कूल के दोस्तों के लिए इसे मानना और भी मुश्किल था। अगले दिन जब स्कूल गया और अपनी जीत के बारे में बताया, तो दोस्त हैरान रह गए।