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भोपाल। मध्य प्रदेश में आम जनता की समस्याओं के तुरंत समाधान के लिए शुरू की गई ‘CM हेल्पलाइन (181)’ सेवा को आज 31 जुलाई को 12 साल पूरे हो चुके हैं। इस सेवा का उद्देश्य जनता को अधिकारियों के चक्कर काटने से बचाना था, लेकिन आज भी 10% से अधिक शिकायतें ऐसी हैं जिनका 50 दिनों के लंबे समय के बाद भी निपटारा नहीं हो पा रहा है।

4.42 लाख से अधिक शिकायतें आईं

इस साल केवल 1 से 31 जुलाई के बीच प्रदेश के सभी 55 जिलों से कुल 4 लाख 42 हजार शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से केवल 1 लाख 37 हजार शिकायतों का संतुष्टिपूर्वक समाधान किया जा सका, जबकि बाकी पेंडिंग हैं।

अगर पुरानी शिकायतों को भी जोड़ दिया जाए, तो कुल 13.51 % मामले ऐसे हैं, जो 50 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अटके हुए हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने की थी शुरुआत

31 जुलाई 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘लोक सेवा प्रबंधन विभाग’ का गठन कर 181 हेल्पलाइन सेवा की शुरुआत की थी। वे खुद शिकायतकर्ताओं से सीधे फोन पर बात कर फीडबैक लेते थे और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तत्काल गाज गिरती थी। वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस व्यवस्था की लगातार समीक्षा कर रहे हैं।

इन 4 विभागों में आती हैं सबसे ज्यादा शिकायतें

जनता को सबसे ज्यादा परेशानी बिजली, जमीन, नगर निगम और पंचायतों से जुड़ी सेवाओं को लेकर हो रही है-

  • ऊर्जा विभाग (बिजली): 71,644 शिकायतें
  • राजस्व विभाग (जमीन-जायदाद): 70,689 शिकायतें
  • नगरीय विकास एवं आवास विभाग: 55,701 शिकायतें
  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग: 52,874 शिकायतें

4 स्तरों पर होता है समाधान का प्रयास

नियमानुसार CM हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को निपटाने के लिए अधिकारियों के 4 स्तर (L1 से L4) तय किए गए हैं। प्रत्येक स्तर के अधिकारी को शिकायत पर फैसला लेने के लिए 7 दिनों का समय दिया जाता है।

CM हेल्पलाइन के 12 सालों के आंकड़े (एक नजर में)-

  • अब तक दर्ज कुल शिकायतें: लगभग 3.8 करोड़
  • संतुष्टि के साथ बंद की गईं शिकायतें: 75.5 %
  • कुल निराकृत शिकायतें: 98.4 %
  • रोजाना आने वाले कॉल: लगभग 60 हजार
  • रोजाना दर्ज होने वाली शिकायतें: लगभग 15 हजार
  • वर्तमान में कुल लंबित (पेंडिंग) शिकायतें: 1.6 %