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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से देश के पांच शहरों की पहचान कर वहां पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा, ताकि हर सड़क के साथ ठीक से पहचान कर और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ उपलब्ध कराया जा सके। कोर्ट ने कहा कि सड़क जहां है, वहां पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ सुनिश्चित करना जरूरी है।

पीठ ने केंद्र से ऐसी केंद्रीय अथॉरिटी की पहचान करने को भी कहा, जो देशभर में फुटपाथ उपलब्ध कराने और उन्हें अतिक्रमण मुक्त रखने की व्यवस्था लागू करने के लिए जिम्मेदार होगी। केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से पीठ ने कहा कि जिस अथॉरिटी को यह जिम्मेदारी दी जाएगी, उसके पास पर्याप्त जगह, फंड, कर्मचारी और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। पीठ ने पूछा, ‘यह केंद्रीय अथॉरिटी कौन होगी, हमें बताइए। अथॉरिटी के पास फंड, स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। दूसरा, हमें बताइए कि पायलट प्रोजेक्ट के लिए 5 शहर कौन से हो सकते हैं।’

फुटपाथ की जिम्मेदारी तय करे केंद्र

नटराज ने कोर्ट को इस संबंध में जानकारी देने की बात कही। इसके बाद पीठ ने केंद्र को फुटपाथ के निर्माण और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अथॉरिटी की पहचान करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून को दिए महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि निर्धारित और चिह्नित फुटपाथ पर पैदल चलना संविधान के तहत मौलिक अधिकार है।

देशभर में फुटपाथ की व्यवस्था सुधारने की तैयारी

कोर्ट ने कहा कि फुटपाथ केवल बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी नियमित देखरेख भी जरूरी है। फुटपाथ अतिक्रमण से मुक्त रहें और पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता मिले, इसके लिए जिम्मेदार अथॉरिटी को लगातार निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।