भोपाल । ‘ब्रिक्स’ देशों के सांस्कृतिक कार्य समूह और संस्कृति मंत्रियों का सम्मेलन बुधवार से भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा। इसमें सदस्य देशों के बीच यूनेस्को की विश्व धरोहर के लिए संयुक्त नामांकन पर सहमति बन सकती है।
अभी एक देश वर्ष में एक धरोहर के लिए नामांकन कर सकता है। भारत की आखिरी (45वीं) धरोहर सारनाथ को इसमें शामिल किया गया है।
भारतीय विरासत की वापसी की उम्मीद
संयुक्त नामांकन का लाभ यह होगा कि कोई भी देश अपनी संस्कृति से जुड़ी दूसरे देश में स्थित धरोहर के लिए नामांकन कर सकता है। जैसे बौद्ध संस्कृति से जुड़ी कई धरोहरें जापान और दूसरे देशों में हैं। कंबोडिया सहित कुछ देशों में मंदिर भी इसी तरह से हैं। इससे भारत के साथ सहभागी देशों को भी लाभ मिलेगा।
इसके अतिरिक्त लूट या चोरी कर एक से दूसरे देशों में ले जाई गईं सांस्कृतिक धरोहरों (मूर्तियां, पांडुलिपियां, कलाकृतियां, आभूषण, शिलालेख आदि) को वापस लाने के लिए संयुक्त घोषणा पत्र जारी हो सकता है। बैठक में सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा, संग्रहालय, सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा होगी।
वाग्देवी की प्रतिमा लाने के लिए हो रहा पत्राचार
केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने बताया कि ब्रिटिश म्यूजियम लंदन में रखी वाग्देवी (मां सरस्वती) की प्रतिमा को लाने का प्रयास किया जा रहा है। भारत सरकार की तरफ से ब्रिटेन सरकार और म्यूजियम को पत्र लिखा गया है।
निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत इसे लाने का प्रयास एक वर्ष से किया रहा है। तमिलनाडु की दो प्रतिमाएं लाने में हम सफल भी रहे हैं। वर्ष 2014 के बाद 650 धरोहरों को लाया गया है, जबकि इसके पहले 13 ही लाई गई थीं।
संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति
मंगलवार को भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल और मप्र के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के एसीएस शिवशेखर शुक्ला ने यह जानकारी दी। अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत कर रहा है।
इसके अंतर्गत अलग-अलग कार्य समूह की बैठकें अलग-अलग स्थानों पर हो रही हैँ। संस्कृति समूह की पहली बैठक वर्चुअल, दूसरी जून में वाराणसी में और तीसरी व अंतिम बैठक भोपाल में हो रही है जिसमें संयुक्त घोषणा पत्र भी जारी किया जाएगा।
सम्मेलन में पहले दो दिन 5 और 6 अगस्त को सदस्य और सहभागी (पार्टनर) देशों के अधिकारियों के बीच सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने और घोषणा पत्र के संभावित बिंदुओं पर चर्चा होगी। 7 और 8 अगस्त को सदस्य देशों के संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी, जिसमें घोषणा पत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा।



