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भगवान नारायण की महिमा सुन जयकारों से गूंजा पांडाल,
भागवत कथा में अजामिल हिरण्याक्ष सहित राजा बलि के चरित्रों का वर्णन

भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है- शशांक शेखर महाराज

अंकिता राज भोपाल

भोपाल। दाना पानी रोड स्थित ईश्वर नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक पं. शशांक शेखर महाराज ने अजामिल प्रसंग सहित श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रेरणादायी प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान की भक्ति में लीन होकर कथा का रसपान किया।

कथावाचक आचार्य शशांक शेखर महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसिद्ध अजामिल प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि मनुष्य कितना भी पापमय जीवन क्यों न जी ले, यदि वह सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है तो उसके लिए मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं। उन्होंने कहा कि अजामिल ने जीवन के अंतिम क्षणों में “नारायण” नाम का उच्चारण किया, जिसके प्रभाव से विष्णुदूतों ने उसकी रक्षा की और उसे आत्मकल्याण का मार्ग प्राप्त हुआ। इसके साथ ही आगे के प्रसंग में हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप के भगवान नारायण के विभिन्न अवतारों द्वारा किए गए वध का वर्णन किया। कथा के दौरान राजा बली और भगवान विष्णु के वामन अवतार के बीच हुए संवाद एवं राजा बलि के दानवीर प्रवृत्ति का सजीव मनोहारी चित्रण किया गया।

आचार्य ने कहा कि कलयुग में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे सरल और प्रभावी साधन है। नाम-जप, सत्संग और भक्ति से व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को कुसंगति से दूर रहने तथा धर्म, सदाचार और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।