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नई दिल्ली: बांग्लादेश से पिछड़ रहे भारतीय गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (कपड़ा निर्माण) पर अब भीषण गर्मी की भी मार पड़ रही है। एनवाईयू स्टर्न सेंटर फॉर बिजनेस एंड ह्यूमन राइट्स (NYU Stern Center) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक यूनीक्लो (Uniqlo), मार्क्स एंड स्पेंसर (Marks & Spencer) और टेस्को (Tesco) जैसे ग्लोबल ब्रांड को कपड़े सप्लाई करने वाली भारतीय फैक्ट्रियों को भीषण गर्मी के कारण 10% तक का प्रोडक्शन कम हो गया है।

यह स्टडी देश के चार अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित 10 गारमेंट फैक्ट्रियों पर की गई है। इसमें सामने आया है कि गर्मी में अधिक तापमान के कारण कपड़ों की क्वालिटी, तय समय पर डिलीवरी और वर्कफोर्स पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार यह भारत के 39 अरब डॉलर के रेडीमेड कपड़ा निर्यात उद्योग के लिए एक बड़ा जलवायु जोखिम है। भारत की इस इंडस्ट्री में करीब 4.5 करोड़ लोग काम करते हैं। इनमें करीब 70% महिलाएं हैं।

फैक्ट्रियों में कैसे पड़ रहा असर?

रिपोर्ट की मुख्य लेखिका और एनवाईयू स्टर्न सेंटर की सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट लूसी सियर्स ने कहा कि कई सप्लायर्स इस भीषण गर्मी से निपटने के लिए बस किसी तरह अस्थायी तौर पर काम चला रहे हैं। फैक्ट्री मैनेजर्स के मुताबिक ज्यादा गर्मी के कारण काम पर कई तरह से प्रभाव पड़ रहा है। कुछ इस प्रकार हैं:

  • कपड़ों पर पसीने के दाग लग रहे हैं।
  • फैक्ट्रियों में धूल का प्रदूषण बढ़ रहा है।
  • सिलाई में गलतियां हो रही हैं।
  • बहुत ज्यादा तापमान होने पर काम को बीच-बीच में अस्थायी रूप से रोकना पड़ रहा है।