तेल अवीव: सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए डिफेंस पैक्ट के बाद इजरायली डिफेंस सर्किल में भारत को ‘इंश्योरेंस पॉलिसी’ की तरह देखा जा रहा है। इजरायल में जेडी वेंस और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुए उस ‘तकरार’ पर बात हो रही है जिसमें अमेरिकी उप-राष्ट्रपति ने अमेरिका को इजरायल का एकमात्र पार्टनर कहा था। इजरायली पीएम ने इसपर पलटवार करते हुए कहा था ‘क्या हमें सिर्फ एक ही नेता पसंद करता है? भारत से तो मेरे फेसबुक पर संदेशों की बाढ़ आ गई है।’
इजरायली अखबार ‘इजरायल हायोम’ में एक्सपर्ट डॉ. ओश्रित बिरवाडकर ने लिखा है ‘नेतन्याहू भारत को लेकर गलत नहीं थे। एशियाई दिग्गज के इतने बड़े सपोर्ट के पीछे एक गहरा रिश्ता है जो एक-दूसरे के हितों पर बना है और एक ऐसी साझा किस्मत है जो जिंदा रहने की एक ऐसी सिक्योरिटी सच्चाई पर आधारित है जिसे कोई भी अमेरिकी कभी नहीं समझ पाएगा।’
‘भारत और इजरायल के दुश्मन खून बहाने को बेताब’
उन्होंने लिखा है ‘दुनिया को देखने का नजरिया सबसे पहले भूगोल पर आधारित होता है। अमेरिका दोनों तरफ से दो महासागरों से सुरक्षित है और उसकी सीमाएं दो ऐसे दोस्ताना देशों से मिलती हैं जो सैन्य रूप से उससे कमजोर हैं। आम अमेरिकी के लिए अपनी जमीन पर सैन्य खतरे की बात लगभग काल्पनिक लगती है। लेकिन इजरायल और भारत की जमीनी सीमाएं सीधे तौर पर ऐसे दुश्मनों से जुड़ी हैं जो अस्थिर हैं हिंसक हैं और उनका खून बहाने को बेताब हैं।’
डॉ. ओश्रित बिरवाडकर के मुताबिक दशकों तक इजरायल को मान्यता न देने के बाद भू-राजनीतिक बदलावों, भारत की आर्थिक तरक्की और देश में दक्षिणपंथी विचारधारा के उभार ने यरूशलेम के साथ बहुत करीबी रिश्ते बनाने का रास्ता साफ किया। इसमें कोई शक नहीं कि यह बदलाव बीजेपी के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण हुआ। भारतीय राजनीति पर अपनी मजबूत पकड़ के कारण बीजेपी इजरायल के साथ रिश्तों में स्थिरता लाती है।
‘भारत ने आगे बढ़कर किया इजरायल का समर्थन’
इजरायली एक्सपर्ट ने लिखा है कि जब आजाद दुनिया के नेता इजरायल के लिए समर्थन जाहिर करने में जूझ रहे थे तब मोदी और उनकी पार्टी यरूशलेम के समर्थन में आवाज उठाने वालों में सबसे आगे थे। नेतन्याहू के लाखों भारतीय फॉलोअर्स असल में सोशल मीडिया पर हमारी लड़ाई लड़ने वाले सक्रिय ऑनलाइन यूजर्स हैं न कि सिर्फ बॉट्स।
उन्होंने लिखा है कि भारत के साथ गठबंधन अमेरिका का विकल्प नहीं है लेकिन उभरती हुई बहुध्रुवीय दुनिया में जहां अमेरिका अब केंद्र-बिंदु नहीं रहा यह निश्चित रूप से एक जरूरी इंश्योरेंस पॉलिसी है। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए अहम देश होने के नाते इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव डालना, कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करना और आर्थिक रूप से बहिष्कार करना बहुत मुश्किल होगा।



