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 गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से डिजिटल फ्रॉड और आर्थिक धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गुलरिहा थाना क्षेत्र में फर्जी UPI स्क्रीनशॉट के जरिए करीब 24 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। आरोप है कि कंपनी के फाउंडर, एजेंट और उनके सहयोगियों ने केवल 1 रुपये का ट्रांजेक्शन कर उसे डिजिटल एडिटिंग के जरिए लाखों-करोड़ों रुपये का निवेश दिखाया और इसी आधार पर कंपनी के खातों में हेराफेरी की। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कारोबारी ने लगाया 24 करोड़ की ठगी का आरोप

गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के रेल विहार फेज-1 निवासी कारोबारी विश्वजीत श्रीवास्तव ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनकी कंपनी से जुड़े फाउंडर सोनू जायसवाल और एजेंट शिवम जायसवाल ने सुनियोजित साजिश के तहत करीब 24 करोड़ रुपये का गबन किया। पीड़ित के अनुसार, वर्ष 2023 में कारोबारी संबंध बनने के बाद आरोपियों ने निवेश और रियल एस्टेट कारोबार के नाम पर विश्वास जीतकर आर्थिक धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

1 रुपये भेजकर लाखों का फर्जी निवेश दिखाने का खेल

शिकायत के मुताबिक ठगी का तरीका बेहद शातिराना था। आरोपी कंपनी के बैंक खाते में केवल 1 रुपये ट्रांसफर करते थे। इसके बाद डिजिटल एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से उसी ट्रांजेक्शन का फर्जी UPI स्क्रीनशॉट तैयार किया जाता था, जिसमें रकम लाखों और करोड़ों में दिखाई जाती थी। इन फर्जी स्क्रीनशॉट्स को अकाउंट रिकॉर्ड में लगाकर बड़े निवेश का दावा किया जाता रहा।

इंटरनल ऑडिट में खुला करोड़ों के गबन का राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब कंपनी का इंटरनल ऑडिट कराया गया। शुरुआती जांच में 4.50 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन संदिग्ध मिले। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कथित घोटाले की रकम बढ़कर 24 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी गई रकम को आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों और करीबियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर निजी खातों में डायवर्ट किया।

कोर्ट के आदेश पर 21 लोगों पर केस दर्ज

मामले की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित पक्ष कोर्ट पहुंचा जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर गुलरिहा थाने में 21 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मुख्य आरोपी सोनू जायसवाल, शिवम जायसवाल, संजू जायसवाल, सुदामा कुशवाहा, राहुल कुमार समेत अन्य के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस जांच में सामने आ सकती हैं और परतें

सीओ गोरखनाथ रवि सिंह के अनुसार, मामला आर्थिक अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी से जुड़ा है। पुलिस पूरे ट्रांजेक्शन नेटवर्क, बैंक खातों और तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। संभावना है कि जांच में और नाम व वित्तीय लेनदेन सामने आ सकते हैं।