- फ्रांस अपनी संप्रभुता यानी अपने फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता को बहुत महत्व देता है।
- संप्रभुता का संबंध देश के उद्योग से भी है। इसलिए हम समझते हैं कि भारत अपने रक्षा उद्योग को एक खास स्तर तक आत्मनिर्भर बनाना चाहता है।
- इस पर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि भारतीय वायुसेना को राफेल में दूसरे हथियार लगाने के लिए ज्यादा लचीलापन और क्षमता कैसे दी जाए।
- इस पर फ्रांसीसी रक्षा उद्योग और भारत के उद्योग और राजनीतिक स्तर पर बातचीत की जा सकती है।
- मुझे भरोसा है कि हम ऐसा कोई रास्ता निकाल सकते हैं, जिससे भारत को इस क्षेत्र में ज्यादा स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता मिल सके।
क्या होता है सोर्स कोड
किसी आधुनिक लड़ाकू विमान का सोर्स कोड उसके सॉफ्टवेयर का मूल प्रोग्राम होता है। राफेल में यह विमान के मिशन सिस्टम, सेंसर, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हथियारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों को नियंत्रित करता है। आम तौर पर कोई भी देश इस तरह की संवेदनशील तकनीक का सोर्स कोड दूसरे देश को नहीं देता। इंडियन डिफेंस सोर्स कह चुके हैं कि राफेल में भारतीय हथियारों को इंटीग्रेट करने के लिए पूरे सोर्स कोड की जरूरत नहीं होगी। ये काम Interface Control Document यानी ICD से हो जाता है। यह बताता है कि विमान के सिस्टम और बाहर से जोड़े जाने वाले हथियार या सेंसर आपस में किस तरह कम्युनिकेट करेंगे। फ्रांसीसी वायुसेना अभी राफेल के F4 और F4.1, F4.2 जैसे वर्जन का इस्तेमाल कर रही है। राफेल का F5 वर्जन 2035 में आएगा।



