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भोपाल: प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और सहकारिता आधारित संकलन-प्रसंस्करण को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में 8 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ अनुबंध किया गया था। इसका प्रमुख लक्ष्य प्रदेश में प्रतिदिन दुग्ध संकलन को 9.5 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 50 लाख किलोग्राम तक पहुंचाना है।

संकलन बढ़ाने की बड़ी चुनौती

पिछले एक वर्ष में दुग्ध संकलन में करीब साढ़े तीन लाख किलोग्राम की वृद्धि हुई है, जिससे यह आंकड़ा साढ़े 12 लाख किलोग्राम तक पहुंचा है। हालांकि, 50 लाख किलोग्राम के लक्ष्य तक पहुंचना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

तकनीक से जुड़ेगा डेयरी सेक्टर

पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने ‘गोरस मोबाइल एप’ विकसित किया है। इसके माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को दूध की मात्रा, गुणवत्ता और भुगतान की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी। साथ ही फील्ड फोर्स मॉनिटरिंग एप से मैदानी कर्मचारियों की निगरानी भी की जाएगी।

सहकारी समितियों का विस्तार

वर्ष 2025-26 में 1,752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है, जबकि 701 निष्क्रिय समितियों को फिर से सक्रिय किया गया है। डेयरी विकास योजना के तहत 26 हजार गांवों को जोड़कर किसानों और युवाओं को नई तकनीकों से परिचित कराया जाएगा।

डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

इंदौर में 30 टन क्षमता का दुग्ध संयंत्र शुरू हो चुका है। शिवपुरी में 20 हजार लीटर क्षमता का प्लांट निर्माणाधीन है, जबकि ग्वालियर डेयरी के सुदृढ़ीकरण का कार्य जारी है।

उत्पादन बनाम मार्केटिंग की चुनौती

प्रदेश में प्रतिदिन पांच करोड़ लीटर से अधिक दूध उत्पादन होता है, लेकिन इसका सीमित हिस्सा ही सहकारी क्षेत्र तक पहुंच पा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़े वितरकों से संपर्क बढ़ाने और मार्केटिंग नेटवर्क मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।