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दुबई: ईरान और अमेरिका के बीच समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य खुला था लेकिन हालिया तनाव के चलते ये फिर बंद हो गया है। इस समुद्री रूट से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले हुए हैं, जिससे यहां यातायात बहुत कम हो गया है। इसने दुनिया के बड़े हिस्से की चिंता बढ़ाई है। खासतौर से खाड़ी देश ों को अपने तेल और गैस के एक्सपोर्ट की चिंता है। ऐसे में तेल-गैस से संपन्न खाड़ी देश इस रूट के विकल्प खोज रहे हैं। वे नई पाइपलाइनों और एक नए बंदरगाह के जरिए भविष्य में किसी भी रुकावट से निपटने की तैयारी कर रही हैं।

एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि ईरान कुछ महीनों तक होर्मुजका इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं। उनका तर्क है कि युद्ध ने दुनिया को हालात के हिसाब से ढलने और ऊर्जा के लिए सिर्फ एक संकरे रास्ते पर अपनी भारी निर्भरता कम करने के लिए मजबूर किया है। हालांकि लंबे समय में ये विकल्प कितने कारगर होंगे, इस पर राय बंटी हुई है।

खाड़ी देश होर्मुज को कैसे बायपास करेंगे

ईरान पर हमले यानी 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया का पांचवां हिस्सा (20 फीसदी) तेल और गैस का व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य से होता था। इससे बाकी दुनिया को रोजाना 2 करोड़ (20 मिलियन) बैरल तेल मिलता था। एक्सपर्ट का दावा है कि लड़ाई फिर से शुरू होने के बावजूद ग्लोबल ऑयल मार्केट में घबराहट कम है, जिसकी वजह आपातकालीन योजनाएं हैं।

एडवाइजरी कंपनी क्रिस्टोल एनर्जी सीईओ डॉक्टर नखले ने सऊदी अरब के वैकल्पिक रास्ते ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने एक्सपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हटाकर अपनी उस पाइपलाइन में भेजना शुरू कर दिया, जो पूरे देश से होते हुए ‘रेड सी’ (लाल सागर) तक जाती है।

सऊदी की तेल पाइपलाइन

ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन 1980 के दशक की शुरुआत में बनाई गई थी। यह सऊदी अरब में 1,200 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के जरिए कच्चा तेल ले जाती है और पूर्व में अबकैक ऑयल प्रोसेसिंग सुविधा को पश्चिम में यानबू के रेड सी पोर्ट से जोड़ती है। वहां से सऊदी तेल टैंकरों में भरा जाता है और रेड सी से होते हुए स्वेज नहर के जरिए यूरोप या बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गल्फ ऑफ एडेन तक ले जाया जाता है।

इस पाइपलाइन की क्षमता रोजाना 70 लाख (7 मिलियन) बैरल तेल प्रोसेस करने की है। सऊदी अरब अब इसकी क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे बिना ज्यादा तेल ट्रांसपोर्ट कर सके। डॉ नखले का कहना है कि यूएई भी यही किया है। उन्होंने अपने एक्सपोर्ट का कुछ हिस्सा होर्मुज से हटाकर दूसरी पाइपलाइन में भेजा है, जो उनके तेल एक्सपोर्ट को होर्मुज इलाके के बाहर ले जाती है

UAE की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन

यूएई क्रूड ऑयल पाइपलाइन (हबशान-फुजैराह पाइपलाइन) पर काम कर रहा है। यह अबू धाबी के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में मौजूद तेल क्षेत्रों से हर दिन 1.8 मिलियन बैरल तक तेल उस अमीराती टर्मिनल तक ले जा सकती है। यह जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के पूर्वी हिस्से में है, जो चोक पॉइंट (संकरी और अहम समुद्री जगह) से बचकर निकलता है।

यूएई होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी निर्भरता को और कम करने के लिए एक नया बंदरगाह बनाने की भी कोशिश कर रहा है। दुबई की एक सप्लाई चेन कंपनी फुजैराह के तटीय इलाके में एक नया बंदरगाह और कंटेनर टर्मिनल बनाने के लिए बातचीत कर रही है, जहां मौजूदा हबशान-फुजैराह पाइपलाइन खत्म होती है।

इराक में पाइपलाइन

नई योजनाओं पर नजर रखने के साथ-साथ दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर पहले से ही काम चल रहा है। ये इन देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से बचने में मदद करेंगे। यूएई ने एक और पश्चिम-पूर्व पाइपलाइन का निर्माण शुरू कर दिया है, जिसे युद्ध शुरू होने के बाद से तेजी से पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके 2027 में पूरा होने की उम्मीद है।

इराक में भी बसरा-हदीथा पाइपलाइन को 2024 में मंजूरी मिली है। यह एक बहुत बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत इराक के दक्षिणी शहर बसरा के आस-पास के तेल क्षेत्रों को जॉर्डन के लाल सागर वाले बंदरगाह शहर अकाबा से जोड़ा जाएगा और सीरिया व तुर्की से गुज़रने वाले प्रोजेक्ट्स से भी जोड़ा जाएगा।

होर्मुज का कई जादुई समाधान नहीं

कुछ एनालिस्ट वैकल्पिक रास्तों से होर्मुज पर दुनिया की निर्भरता को कम होने की बात कह रहे हैं लेकिन कई इसे नकार रहे हैं। वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट के एनर्जी पॉलिसी एनालिस्ट साइमन हेंडरसन का कहना है कि लोग जल्दबाजी में बहुत आगे की सोच रहे हैं। इनमें से कुछ पाइपलाइन प्रस्ताव मुख्य रूप से भूमध्य सागर के तट तक तेल पहुंचाने के लिए हैं। यह वह जगह नहीं है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

एक्सपर्ट ने इसको लेकर भी आगाह किया है कि ईरान एक और अहम समुद्री रास्ते बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद कर सकता है। यह यमन और अफ्रीका के बीच एक संकरा रास्ता है जो लाल सागर और एशिया के बीच आने-जाने का जरिया है। दुनिया का लगभग 5 प्रतिशत तेल उत्पादन इस जलडमरूमध्य से गुजरता है।

नए प्रोजेक्ट पर भी संकट

कुछ साल पहले बाब अल-मंडेब क्षमता दोगुनी थी। 2023 में इजरायल-हमास युद्ध की शुरुआत में यमन में हूथी लड़ाकों ने कमर्शियल जहाजों पर बार-बार हमले किए। यमन में हूती शिपमेंट में रुकावट डाल रहे हैं। इसलिए सऊदी पाइपलाइन एक आंशिक समाधान तो है, लेकिन पूरी तरह भरोसेमंद समाधान नहीं है।

वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट में गल्फ एंड एनर्जी पॉलिसी प्रोग्राम के डायरेक्टर मिस्टर हेंडरसन कहते हैं कि यूएई की नई योजनाएं भी बहुत भरोसेमंद समाधान नहीं हैं। फुजैराह बंदरगाह पर ईरान पहले ही हमला कर चुका है। इसलिए फुजैराह तक एक और पाइपलाइन बनाना समस्या का समाधान कर दे, ये जरूरी नहीं है।