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भोपाल में सूखे कचरे से टोरीफाइड चारकोल (कोयला) का उत्पादन सितंबर तक शुरू होगा। अगले तीन महीनों में कंपनी और निगम द्वारा किए जाने वाले कार्यों की समय सीमा तय की गई है। यह चारकोल प्लांट वाराणसी के बाद देश में दूसरा है। इससे बने कोयले का उपयोग बिजली उत्पादन में होता है। नगर निगम कमिश्नर ने बताया कि अनुबंध के तहत आदमपुर छावनी में 15 एकड़ जमीन पर इसे बनाया जा रहा है।

यहां 400 टन सूखे कचरे से रोजाना टोरीफाइड चारकोल बनेगा। अभी निगम सूखे कचरे के निष्पादन पर हर साल 7 से 8 करोड़ रुपए खर्च करता है। यह रकम भी बचने लगेगी। चारकोल प्लांट पर 250 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह पीपीपी मॉडल पर बनाया जा रहा है। नगर निगम का दावा है कि से प्रतिदिन 400 टन सूखे कचरे से टोरीफाइड चारकोल बनाया जा सकेगा।

यह भी बनाए जा रहे आदमपुर में करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से रेंडरिंग प्लांट और डेड एनिमल इनसीनेटर प्लांट बनाया जा रहा है। इसकी प्रतिदिन क्षमता 50 टन है। यह भी पीपीपी मोड पर बनाया जा रहा है। फर्म द्वारा स्लॉटरिंग प्लांट से मृत पशुओं के अवशेष को रेंडरिंग प्लांट लाया जाएगा। इससे डॉग फूड, मुर्गी पालन के लिए दाना आदि का उत्पादन किया जाएगा।

3.2 करोड़ से प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट आदमपुर में करीब 3.2 करोड़ रुपए की लागत से प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट बनाया जा रहा है। फर्म द्वारा लैंडफिल साइट से प्लास्टिक का संग्रहण कर निष्पादन करते हुए प्लास्टिक शीट, बोर्ड आदि तैयार किया जाएगा। निगम को हर साल 3.84 लाख की रॉयल्टी मिलेगी।