अक्सर गट हेल्थ की बात होती है ही गैस, कब्ज, दस्त, ब्लोटिंग या एसिडिटी जैसे पाचन संबंधी लक्षणों का ख्याल आता है। लेकिन आंतों का काम सिर्फ खाना पचाने तक सीमित नहीं है। हमारी आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीव यानी Gut Microbiome मेटाबॉलिज्म, इम्यून सिस्टम और ब्रेन-गट कम्युनिकेशन जैसे आदतों से जुड़े हुए हैं। इसलिए गट में होने वाले बदलावों का असर पाचन के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है। हालांकि थकान, खराब नींद, मूड में बदलाव या स्किन प्रॉब्लम को देखकर सीधे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि गट हेल्थ खराब है। इन सभी के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
गट हेल्थ और बाकी शरीर के बीच क्या कनेक्शन है?
हमारी इंटेस्टाइन की लाइनिंग एक तरह की प्रोटेक्टिव बैरियर का काम करती है। इसके आस-पास इम्यून सेल्स और माइक्रोऑर्गेनिज्म का कॉम्प्लेक्स इकोसिस्टम मौजूद रहता है। गट माइक्रोबायोम इस माहौल में इम्यून रेगुलेशन और इंटेस्टाइनल बैरियर फंक्शन को प्रभावित कर सकता है।
एनसीबीआई के मुताबिक इसके अलावा गट और ब्रेन के बीच कम्युनिकेशन वेगस नर्व, एंडोक्राइन सिग्नल, इम्यून पाथवे और माइक्रोबियल मेटाबोलाइट्स के जरिए हो सकता है। इसी कनेक्शन को गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है।
गट हेल्थ के पाचन के अलावा अन्य संकेत क्या हो सकते हैं?
लगातार थकान बनी रहना
यदि आपको पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान महसूस होती है, तो इसका कारण सिर्फ काम का तनाव नहीं है। पोषण की कमी, एनीमिया, थायराइड की समस्याएं, नींद संबंधी विकार, संक्रमण और कई अन्य चिकित्सीय स्थितियां भी थकान पैदा कर सकती हैं।
स्टडी के अनुसार आपकी आंत में मौजूद बैक्टीरिया और दूसरे जीवित सूक्ष्मजीव, जिन्हें ‘गट माइक्रोबायोम’ कहा जाता है, आपके एनर्जी लेवल पर असर डाल सकते हैं। आंत से सेरोटोनिन बनता है, जो दिमाग का एक केमिकल है और मूड व नींद को कंट्रोल करता है। शरीर का 95% तक सेरोटोनिन आंत से ही आ सकता है।
नींद से जुड़ी समस्या
एनसीबीआई के मुताबिक रात में नींद न आना, बार-बार जागना या सुबह उठने के बाद भी तरोंताजा महसूस न होना जैसे कई लक्षण हो सकते हैं। तनाव, चिंता, कैफीन, स्क्रीन एक्सपोजर, अनियमित नींद का शेड्यूल और चिकित्सीय स्थितियां इनमें सामान्य रूप से शामिल हैं। आंत और मस्तिष्क के बीच मौजूद संचार नेटवर्क को देखते हुए शोधकर्ताओं ने माइक्रोबायोम और नींद से संबंधित प्रक्रियाओं के बीच उपभोग का अध्ययन किया है। आंत-मस्तिष्क में माइक्रोबियल मेटाबोलाइट्स, प्रतिरक्षा संकेत और न्यूरोएंडोक्राइन मार्ग शामिल होते हैं।
मूड में बदलाव
रिसर्च से पता चला है कि गट माइक्रोबायोम डिप्रेशन, एंग्जायटी और सोचने-समझने से जुड़ी समस्याओं के जोखिम पर असर डाल सकता है। गट की सेहत आपके ध्यान देने की क्षमता और जानकारी को समझने के तरीके पर भी असर डाल सकती है।
त्वचा से जुड़ी समस्याएं
पेट के माइक्रोबायोम में असंतुलन से त्वचा में बदलाव हो सकते हैं, जैसे कि लालिमा और जलन दिखाई देना। जब पेट में सूजन (inflammation) होती है, तो इससे पूरे शरीर में सूजन हो सकती है। स्टडी के अनुसार पेट के माइक्रोबायोम में असंतुलन से त्वचा में रोसेसिया (Rosacea), एक्जिमा (Eczema) और सोरायसिस (Psoriasis) का खतरा बढ़ सकता है।
गट हेल्थ का मतलब सिर्फ यह देखना नहीं है कि आपको कब्ज, गैस या ब्लोटिंग है या नहीं। गट माइक्रोबायोम इम्यून सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और ब्रेन-गट कम्युनिकेशन जैसे डाइट से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से वैज्ञानिक थकान, नींद, मूड, स्किन, फूड सेंसिटिविटी और भूख/वजन जैसे नॉन-डाइजेस्टिव पहलुओं के साथ गट माइक्रोबायोम के संभावित संबंधों का अध्ययन कर रहे हैं। गट हेल्थ में सुधार के लिए आप संतुलित, फाइबर युक्त आहार, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ लाइफस्टाइल को प्राथमिकता दे सकते हैं। यदि आपको पेट या पेट से जुड़ी समस्या लगातार बनी हुई है तो ऐसे में किसी भी तरह की दवा का सेवन खुद से ना करें, और समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें।



