Spread the love

नई दिल्‍ली: राष्‍ट्रपति बनने के तुरंत बाद वियतनाम ी लीडर टो लैम चीन गए तो बहुत कम लोग हैरान हुए। हर बड़ा वियतनामी लीडर ऐसा करता रहा है। यह आर्थिक जरूरत की कड़वी सच्चाई को दिखाता है। बीजिंग वियतनाम का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। इकनॉमिक लाइलाइन। हालांकि, शी जिनपिंग से मिलने के कुछ ही हफ्तों के अंदर टो लैम नरेंद्र मोदी के साथ हाई-लेवल बातचीत के लिए नई दिल्ली पहुंचे। इस दौरे के आखिर तक भारत -वियतनाम ने अपने रिश्तों को ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ा दिया। यह भारत की ओर से किसी भी देश को दी जाने वाली सबसे टॉप डिप्लोमैटिक कैटेगरी है।

दोनों दौरों ने वियतनाम की बैलेंसिंग स्ट्रैटेजी की एक साफ झलक दिखाई। वह चीन पर बढ़ती डिपेंडेंस से निपट रहा है। साथ ही भारत के साथ चुपचाप स्ट्रैटेजिक कोऑपरेशन को गहरा कर रहा है। यह इस क्षेत्र के कई देशों के लिए संकेत है। चीन की विस्‍तारवादी सोच से पार पाने के लिए भारत पर भरोसा करना ही विकल्‍प है।