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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के नेताओं की ओर से एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर भारत विरोधी बयान दिए गए हैं। पाकिस्तान ने कथित ‘कश्मीर आत्मनिर्णय अधिकार दिवस’ के मौके पर कहा कि कश्मीरियों को अपना भविष्य चुनने का मौका मिलना चाहिए और यह जनमत संग्रह के जरिए किया जाए। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने बयानों में बात कही है, जिसमें उनके निशाने पर सीधेतौर पर भारत रहा है।

शहबाज शरीफ ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की वजह कश्मीर को बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के तहत इस विवाद का समाधान होने पर ही दक्षिण एशिया में शांति आएगी। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, शरीफ ने कहा कि कश्मीर के आत्मनिर्णय के अधिकार दिवस 5 जनवरी 1949 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव की याद दिलाता है। यह प्रस्ताव जनमत संग्रह की बात कहता है।

सिंधु जल संधि का जिक्र

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपने बयान में कहा है कि हम कश्मीर में भारत के खिलाफ लोगों को अपना नैतिक और राजनयिक समर्थन लगातार देता रहेगा। जरदारी ने सिंधु जल संधि का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर से निकलने वाली नदियों पर भारत का बढ़ता नियंत्रण एक और गंभीर चुनौती बनकर उभरा है

जरदारी ने कहा कि भारत ने सिंधु जल संधि को एकतरफा निलंबित करके अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लंघन किया है। यह पानी को हथियार बनाने का एक खतरनाक प्रयास है। यह लाखों लोगों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा और शांति को खतरे में डालता है, जो इन साझा संसाधनों पर निर्भर हैं। ऐसे में इसे रोका जाना चाहिए। उन्होंने दुनिया से भारत पर दबाव डालने की गुहार लगाई है।