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 भोपाल। हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग पढ़ाने की राह कठिन होती दिख रही है। पाठ्यक्रम, पुस्तक और प्राध्यापकों की कमी से इस माध्यम से पढ़ाई करने की ओर रुझान सीमित है। प्रदेश में सत्र 2022-23 से हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की गई थी। 150 में से चार कॉलेजों में 224 सीटों पर हिंदी माध्यम से पढ़े हुए इंजीनियर बनाए जाने थे, लेकिन हुआ इसके उलट। तीन साल में इस माध्यम से पढ़ाई करने के लिए केवल 313 विद्यार्थी ही मिल पाए।

भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस प्रयास को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की मंजूरी भी मिली थी। इसके बावजूद प्रदेश का कोई भी सरकारी या निजी इंजीनियरिंग कॉलेज इसे पूरी तरह अपना नहीं पाया। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूआईटी ने भी अब तक हिंदी में इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम शुरू नहीं किया है।

प्राध्यापकों का कहना है कि हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने से पहले कई स्तर पर तैयारियां करनी थी, जो नहीं की गईं। इसका असर हर साल प्रवेश के आंकड़ों में दिखता है। वर्ष 2022 में 19 सीटों पर प्रवेश हुआ, 2023 में 90, 2024 में 104 और 2025 में 97 विद्यार्थी मिल पाए। चालू सत्र में केवल 100 विद्यार्थी हिंदी माध्यम वाले हैं।

हिंदी में किताबें तैयार नहीं करा पाए

एआइसीटीई की ओर से इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की किताबों का हिंदी में अनुवाद करने का जिम्मा राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) को दिया गया था। संस्थान को 81 किताबों का अनुवाद करना था। अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया है।

एक कॉलेज में ही सबसे अधिक प्रवेश

इंदौर स्थित एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी एंड रिसर्च में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग इन इंडियन लैंग्वेज पाठ्यक्रम हिंदी में शुरू किया गया है। यहां 75 सीटें हैं जिनमें से 78 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इसके लिए तीन सीटें टीएफडब्ल्यू से ली गई हैं।