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नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कंपनियों को जीएसटी की कम दरों का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाना चाहिए। जीएसटी काउंसिल में हाल ही में अधिकांश चीजों पर जीएसटी में भारी कमी की है। घटी हुई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। सरकार को इस बात की चिंता है कि कंपनियां जीएसटी में कटौती का फायदा ग्राहकों को देने के बजाय खुद ही हजम कर सकती हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार पूरी तरह अलर्ट है। सीतारमण ने साथ ही कहा कि सरकार अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों को राहत देने के लिए एक पैकेज पर काम कर रही है।

सीतारमण ने TOI के साथ इंटरव्यू में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर जीएसटी में सुधार किए गए हैं। इन सुधारों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जीएसटी में कटौती का फायदा आम आदमी, किसानों और छोटे कारोबारियों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि विभिन्न मंत्रालय पहले से ही इंडस्ट्री के साथ काम कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जीएसटी कटौती का फायदा पूरी तरह से ग्राहकों तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि दरों में बार-बार बदलाव नहीं होगा।

क्या था धर्म संकट?

वित्त मंत्री ने कहा, "हम कीमतों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और सांसदों ने मुझे बताया है कि वे अपने क्षेत्रों में ऐसा कर रहे हैं। मंत्रालय भी संबंधित क्षेत्रों के साथ बातचीत कर रहे हैं। 22 सितंबर से मेरा पूरा ध्यान इस पर होगा।" नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी। यह नवरात्रि का पहला दिन है। महीने भर चलने वाले फेस्टिव सीजन में लोग खूब खरीदारी करते हैं। सीतारमण को उम्मीद है कि 375 वस्तुओं की दरों में कमी से खपत और विकास को बढ़ावा मिलेगा। अब सिर्फ 13 वस्तुएं और सेवाओं को ही सिन एंड लग्जरी वाले स्लैब में रखा गया है।

सीतारमण ने माना कि विपक्षी दलों द्वारा शासित कुछ राज्यों ने जीएसटी काउंसिल की बैठक में रेवेन्यू लॉस की बात कही थी। यह उनकी सार्वजनिक राय से अलग थी, जिसमें उन्होंने दर में कटौती का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, "यह सच नहीं है कि केवल राज्यों के राजस्व पर असर पड़ रहा है। इसमें केंद्र भी बराबर का स्टेकहोल्डर है। क्या यह मेरे लिए धर्म संकट नहीं है? लेकिन जब लोगों की जेब में पैसा जाता है, तो क्या मुझे केवल अपने राजस्व की चिंता करनी चाहिए? यह संभव नहीं है।"