इस्लामाबाद: हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में सऊदी अरब को धोखा देने के बाद पाकिस्तान अब रियाद के साथ रिश्तों को संभालने की कोशिश में लग गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की है। इस दौरान शहबाज ने सऊदी अरब के लोगों और उसकी तेल सुविधाओं समेत बुनियादी ढांचे पर यमन के हूतियों के हमलों की निंदा की। बातचीत के दौरान शहबाज ने सऊदी नेतृत्व और वहां के लोगों के साथ एकजुटता जाहिर की। हालांकि, इस पूरी कवायद को पाकिस्तान की डैमेज कंट्रोल की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान ने सऊदी को छोड़ा अकेला
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान ने मक्का समझौते के बावजूद सऊदी अरब को सैन्य मदद से खुद को दूर रखा है। सऊदी अरब के खिलाफ हो रहे हूतियों के हमले के खिलाफ पाकिस्तान केवल निंदा तक रह गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने साफ कह दिया है कि इस्लामाबाद का हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का कोई विचार नहीं है।
यमन में आगे बढ़ रहे हूती
इस बीच यमन में हालात बिगड़ रहे हैं, जहां सऊदी अरब समर्थित सरकारी सेना और ईरान समर्थित हूती सेना के बीच लड़ाई तेज हो गई है। हूतियों ने पिछले सप्ताह ही लाल सागर के अहम बंदरगाह मोखा और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास एक द्वीप पर कब्जा कर लिया। इसके दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट में से एक पर खतरा मंडराने लगा है। लाल सागर से होने वाली शिपिंग के लिए बाब अल-मंदेब बहुत अहम है।
मक्का समझौते पर उठ रहे सवाल
हूती विद्रोही सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर लगातार हमले कर रहे हैं। इन हमलों ने 7 अगस्त को हुए मक्का समझौते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान, सऊदी और तु्की के बीच हुए रक्षा समझौते में कहा गया है कि तीनों में से किसी पर हमला तीनों पर आक्रमण माना जाएगा। लेकिन अब तक न तो पाकिस्तान और न ही तुर्की ने सऊदी अरब को सैन्य मदद की बात कही है।
पिछले सप्ताह पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह जरूर कहा कि सऊदी अरब पर हमले से यह समझौता लागू हो सकता है। लेकिन उसके बाद से इस्लामाबाद ने इस बात पर जोर दिया है कि यह समझौता मुख्य रूप से बचाव के लिए है और पाकिस्तानी सेना आक्रामक सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगी। इस बात से रियाद में नाराजगी की खबर है। ऐसी रिपोर्ट भी हैं कि पाकिस्तान से धोखा मिलने के बाद रियाद ने हूतियों को रोकने के लिए इजरायल से सहायता की मांग की है। इसके लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जरिए संदेश पहुंचाया गया है।



