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भोपाल। सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों के चारों ओर उनसे सटाकर कंक्रीट डाले जाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कठोर टिप्पणी करते हुए इसे पेड़ों की हत्या करने जैसा बताया है। इस पर सख्ती दिखाते हुए ट्रिब्यूनल ने इस प्रक्रिया को पर्यावरण के लिए हानिकारक बताते हुए संबंधित एजेंसियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

बाबूलाल गौर मार्ग निर्माण और कंक्रीटीकरण का मामला

दरअसल, अवधपुरी क्षेत्र में बाबूलाल गौर मार्ग के निर्माण के दौरान करीब 25 पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट डाल दिया गया, जिससे पेड़ों की जड़ों तक पहुंचने वाला हवा और पानी का प्रवाह बाधित हो गया है। इस मामले में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने कहा है कि इस तरह का कंक्रीटीकरण पेड़ों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और शहरी पर्यावरण को प्रभावित करता है। जड़ों तक हवा और पानी न पहुंचने से न केवल पेड़ नष्ट हो रहे हैं, बल्कि इससे शहर का तापमान बढ़ रहा है और भूजल स्तर गिर रहा है।

एनजीटी के कड़े निर्देश

ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया है कि किसी भी निर्माण कार्य के दौरान पेड़ों के चारों ओर कम से कम एक मीटर खुली मिट्टी छोड़ी जाए। नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और एनएचएआइ को पेड़ों पर लगे बोर्ड, विज्ञापन, बिजली के तार और अन्य अवरोध हटाने के लिए कहा गया है। शहर में पेड़ों के इलाज के लिए नगर निगम एक विशेष ट्री डिजीज सर्जरी यूनिट स्थापित करने पर विचार करे और शहरी विकास विभाग को पूरे प्रदेश के लिए निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों की सुरक्षा हेतु नए दिशा-निर्देश जारी करने होंगे।

पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के मौलिक अधिकार

ट्रिब्यूनल ने शहरी क्षेत्रों में पेड़ों के संरक्षण और रखरखाव के लिए विशेष व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी बताई है। पीठ ने दोहराया कि अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण में जीना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।