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नई दिल्ली: लोन पर स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर है। अगर उन्होंने लोन की किस्त नहीं चुकाई तो उनके डिवाइस पूरी तरह लॉक किए जा सकते हैं। आरबीआई ने EMI पर खरीदे गए डिवाइस को डिसेबल करने के अपने प्रस्तावित नियमों में ढील दी है। पहले 90 दिन तक की देरी तक डिवाइस लॉक नहीं किया जा सकता था लेकिन अब इसे घटाकर 60 दिन कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक ने साथ ही इंडस्ट्री से मिले फीडबैक के बाद रिकवरी एजेंट के लिए जानकारी देने की शर्तों को आसान बनाया है।

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने रेगुलेटेड संस्थाओं के कामकाज और रिकवरी एजेंट को काम पर रखने के बारे में अपने निर्देशों में संशोधित किया है। इसके मुताबिक आरबीआई ने लेंडर्स को EMI पर फाइनेंस किए गए मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप को धीरे-धीरे लॉक करने की इजाजत दे दी है। लोन पेमेंट में 30 से 60 दिन की देरी पर धीरे-धीरे डेवाइस पर पाबंदियां लगा सकता है। पुराने प्रस्ताव में लोन पेमेंट में 90 दिन की देरी होने तक ऐसी कार्रवाई पर रोक थी।

कैसे-कैसे लगेंगी पाबंदियां?

फाइनल नियमों के अनुसार, लेंडर्स तब तक कोई पाबंदी नहीं लगा सकते जब तक लोन की पेमेंट में कम से कम 30 दिन की देरी न हो जाए। साथ ही बैंकों को इस बारे में डिफॉल्टर को औपचारिक नोटिस भी भेजना होगा। पेमेंट में 30 से 60 दिन की देरी होने पर बैंक डिवाइस को लॉक करने की दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि इस दौरान आउटगोइंग कॉल ब्लॉक नहीं की जा सकतीं। कॉन्ट्रैक्ट के तहत पूरी पाबंदियां तभी लागू की जा सकती हैं जब लोन की पेमेंट में 60 दिन से ज्यादा की देरी हो जाए।