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वॉशिंगटन: अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने यूएपीए (UAPA) कानून के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर भारत सरकार पर निशाना साधा है। करीब 9 साल की अनंतिम हिरासत के बाद जगतार सिंह जोहल को जमानत मिलने का स्वागत करते हुए आयोग ने दावा किया कि भारत में शांतिपूर्ण विरोध या मानवाधिकारों पर आवाज उठाने वाले अल्पसंख्यकों को दबाया जा रहा है। अपने बयान में आयोग ने उमर खालिद और शर्जील इमाम का भी जिक्र करते हुए अमेरिकी प्रशासन से सख्त कदम उठाने की अपील की है।

इसने कहा है ‘ब्रिटिश मूल के सिख एक्टिविस्ट जगतार सिंह जोहल को जमानत देने के भारत सरकार के फैसले को देखते हुए यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने अमेरिकी विदेश विभाग से अपील की है कि वह भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता (FoRB) से जुड़े अन्य कैदियों की रिहाई में मदद करे। इनमें से कई जिनमें जगतार सिंह जोहल भी शामिल हैं जो USCIRF की ‘फ्रैंक आर. वुल्फ फ्रीरीडम ऑफ रिलीजन ऑर बिलीफ विक्टिम्स लिस्ट’ में FoRB पीड़ितों के तौर पर दर्ज हैं।’

भारत के UAPA कानून पर अमेरिकी USCIRF ने उठाए सवाल

USCIRF के प्रमुख आसिफ महमूद ने कहा ‘हम नई दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले का स्वागत करते हैं जिसमें जगतार सिंह जोहल को जमानत दी गई है जिन्हें लगभग नौ साल तक बिना किसी कानूनी आधार के हिरासत में रखकर परेशान किया गया। हालांकि उनके यूनाइटेड किंगडम लौटने और परिवार से दोबारा मिलने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।’ उन्होंने आगे कहा ‘जमानत की शर्तों के तहत जोहल को अपना पासपोर्ट जमा करना पड़ा, उन पर प्रेस से बात करने की पाबंदी है और उन पर लगे आठ आरोपों में उन्हें अभी भी मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है।’

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में अधिकारियों ने जोहल को हत्या और आतंकवाद के झूठे आरोपों में ‘गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम’ (UAPA) के तहत गलत तरीके से गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है ‘इसके अलावा जोहल का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें बिजली के झटके देकर, सोने न देकर, तनावपूर्ण स्थितियों में रखकर और जान से मारने की धमकी देकर शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जिससे मजबूरन उन्हें अपना गुनाह कबूल करना पड़ा।’

रिपोर्ट में आगे कहा गया है ‘USCIRF अमेरिकी सरकार से आग्रह करता है कि वह भारतीय अधिकारियों पर दबाव डाले ताकि जोहल की हिरासत और उनके साथ हुए बर्ताव की पूरी जांच हो सके। साथ ही अमेरिकी सरकार को ‘अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम’ के तहत ऐसे गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना चाहिए।’

उमर खालिद और शरजील इमाम पर रिपोर्ट में क्या है?

USCIRF रिपोर्ट में वाइस चेयर सीसी हील ने कहा ‘जोहल का मामला भारत सरकार द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों की आवाज दबाने या उन्हें जेल में डालने के एक बड़े पैटर्न को दिखाता है। उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कई अन्य FoRB कैदी, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के कारण UAPA के कथित उल्लंघन के आरोप में बिना ट्रायल के जेल में बंद हैं। हाल के वर्षों में भारत सरकार ने उत्तरी अमेरिका में सिख समुदाय के सदस्यों की हत्या और हत्या की कोशिशें तक करवाई हैं। ये सीमा-पार दमन की साफ घटनाएं हैं जिनका मकसद प्रवासी समुदाय को डराना, उन पर दबाव डालना और उन्हें परेशान करना है।’