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भोपाल। कोलार रोड स्थित अकबरपुर बाघ भ्रमण क्षेत्र में पहाड़ी कटान, अवैध खुदाई और पेड़ों की कटाई के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कलेक्टर, नगर निगम, वन विभाग और मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने यह नोटिस नवदुनिया में नौ जुलाई को "बाघ भ्रमण क्षेत्र अकबरपुर में पहाड़ी को उजाड़ रहे थे भूमाफिया, रहवासियों ने किया विरोध…" शीर्षक से प्रकाशित समाचार पर स्वत: संज्ञान लेकर जारी किए हैं।

एनजीटी ने आदेश में बताया कि समाचार के अनुसार, रहवासियों ने आरोप लगाया गया था कि सर्वे नंबर-तीन, अकबरपुर की सरकारी भूमि पर जेसीबी और पोकलेन मशीनों से लगातार खुदाई कर पहाड़ी को समतल किया जा रहा है तथा बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। दानिश हिल्स व्यू कालोनी के रहवासियों ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया और हंगामा किया। मशीन संचालकों से अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे, लेकिन कोई वैध सरकारी अनुमति नहीं दिखाई गई।

अधिकरण ने कहा कि संबंधित क्षेत्र बाघों के विश्राम स्थल के रूप में जाना जाता है, जहां मोर, हिरण सहित अन्य वन्यजीवों का नियमित आवागमन रहता है। लगातार खुदाई, पहाड़ी कटान और भारी मशीनों के शोर से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे वन्यजीवों के रिहायशी क्षेत्रों की ओर आने और मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बढ़ सकता है।

एनजीटी ने पर्यावरण से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना

एनजीटी ने प्रथम दृष्टया माना कि मामले में पर्यावरण से जुड़ा गंभीर प्रश्न उठता है। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन, भोपाल कलेक्टर, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भोपाल नगर निगम और वन विभाग को प्रतिवादी बनाकर नोटिस जारी किया है। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है, जिसमें कलेक्टर और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति को मौके का निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक एवं कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।