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नई दिल्ली: मुकेश अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने कंपनियों की एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज बेचकर लगभग 210 अरब रुपये (2.4 बिलियन) जुटाए हैं। यह इस साल भारत में इस तरह का सबसे बड़ा सौदा है। इस बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने यह बात बताई है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक इस इश्यू का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा देश के बड़े एसेट मैनेजरों ने खरीदा है। इनमें आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी, एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड और एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड शामिल हैं।

क्या हैं ये सिक्योरिटीज?

इन सिक्योरिटीज को पास-थ्रू सर्टिफिकेट्स के नाम से जाना जाता है। इन्हें तीन ट्रस्टों (राधाकृष्ण सिक्युरिटाइजेशन ट्रस्ट, शिवशक्ति सिक्युरिटाइजेशन ट्रस्ट और सिद्धिविनायक सिक्युरिटाइजेशन ट्रस्ट) ने जारी किया है। इनकी मैच्योरिटी लगभग तीन, चार और पांच साल है। इन पर औसतन 7.75% का कूपन मिलेगा।

रिलायंस के इस ऑफर को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। निवेशकों को टॉप-रेटेड एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज में निवेश करने का मौका मिला है। अभी तक इस बाजार में नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनियों का दबदबा है। इस डील से भारत के सिक्युरिटाइजेशन बाजार को भी मजबूती मिलेगी। यह बाजार अभी छोटा है, लेकिन इस वित्त वर्ष (मार्च में खत्म होने वाला) में 2.5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। यह जानकारी मूडीज रेटिंग्स की सहयोगी कंपनी आईसीआरए ने दी है।

रिलायंस को मिली मजबूत डिमांड

रिलायंस को मजबूत डिमांड मिली। इसलिए उसने इस ट्रांजैक्शन को बढ़ा दिया। पहले कंपनी 180 अरब रुपये जुटाना चाहती थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 210 अरब रुपये कर दिया गया। यह ट्रांजैक्शन बार्कलेज पीएलसी ने आयोजित किया था।

ये पास-थ्रू सर्टिफिकेट्स डिजिटल फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट से जुड़े लोन पर आधारित हैं। यह ट्रस्ट रिलायंस इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट्स एंड होल्डिंग्स लिमिटेड ने बनाया है। इसके अलावा, ABS ओरिजिनेटर्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज की प्रमोटर एंटिटीज के बीच एक ऑप्शन एग्रीमेंट के तहत पेआउट से भी इन्हें सपोर्ट मिलता है