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भोपाल में भदभदा डैम के पास स्थित मस्जिद को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार (18 अगस्त) को कहा कि भोपाल की सबसे बड़ी खूबसूरती इसके तालाब हैं। शहर को प्रकृति की ओर से मिला यह तोहफा किसी भी कीमत पर अतिक्रमण से बर्बाद नहीं होना चाहिए।

सारंग ने कहा कि लैंड जिहाद के माध्यम से मस्जिदें और मजार बना दी जाती हैं। तालाबों पर इस तरह के अतिक्रमण करना और मस्जिदों का दायरा लगातार बढ़ाना गलत है।

आदेश के बाद निश्चित रूप से कार्रवाई होगी। यदि इस तरह से हठधर्मिता दिखाई जाएगी तो यह सहन नहीं किया जाएगा।

पुराना विवाद, 100 साल पुरानी मस्जिदें यह विवाद नया नहीं है। राजधानी की दिलकश मस्जिद और भदभदा डैम के पास की मस्जिद दोनों करीब 100 साल पुरानी बताई जाती हैं। ये वक्फ संपत्ति में पंजीकृत हैं।

एडवोकेट रफी जुबेरी के अनुसार-

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इनका रिकॉर्ड 1937 से मौजूद है। दिलकश मस्जिद का गजट नोटिफिकेशन भी उपलब्ध है, जबकि भदभदा मस्जिद से सटा 1.44 एकड़ का कब्रिस्तान मस्जिद कमेटी के अधीन है।

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नोटिस और कानूनी लड़ाई 4 जुलाई को टीटी नगर तहसीलदार की ओर से मस्जिद कमेटी को नोटिस भेजा था, जिसमें कहा कि यह निर्माण अवैध है और इसे हटाया जाए। 7 जुलाई की सुनवाई के लिए तारीख तय की गई थी और साफ कर दिया था कि यदि मस्जिद कमेटी ने कार्रवाई नहीं की तो प्रशासन खुद हटाने की कार्रवाई करेगा।

इस बीच वक्फ बोर्ड ने आपत्ति दर्ज कराई। बोर्ड का कहना है कि वक्फ संपत्ति पर बिना सुनवाई किसी भी तरह की कार्रवाई विधिसम्मत नहीं है। 7 जुलाई को तहसीलदार को आपत्ति पत्र भी भेजा गया और एनजीटी में खुद को पक्षकार बनाने की मांग की गई।

इससे पहले टीटी नगर एसडीएम रचना शर्मा कह चुकी हैं कि वक्फ बोर्ड से पत्र मिला है कि बिना सुनवाई कोई कार्रवाई नहीं होगी। इस कारण मस्जिद कमेटी को बुलाकर सुनवाई की जाएगी और उसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।