इस्लामाबाद: पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत लंबे समय से अशांति का शिकार है। सूबे में कई सशस्त्र गुट पाकिस्तान की सेना से आजादी के लिए लड़ रहे हैं। पाकिस्तानी सेना ने जमीन पर इनका मुकाबला करने की कोशिश की है तो हवाई हमलों का भी सहारा लिया है। इसके बावजूद पाकिस्तानी आर्मी यहां पूरी तरह असफल दिखी है। ऐसे में असीम मुनीर के नेतृत्व वाली आर्मी अफगानिस्तान के पूर्व सैनिकों के सहारे बलूचिस्तान में ‘ऑपरेशन’ की तैयारी में है। एक्सपर्ट इसे पाक आर्मी के बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर ‘कत्लेआम के प्लान’ की तरह देख रहे हैं।
बलूचिस्तान पर नजर रखने वाले एक सूत्र ने RFE/RL को बताया है कि सूबे में करीब 2,000 पूर्व अफगान पुलिस अधिकारियों और सैनिकों को भर्ती किया गया है। इन लोगों को एक ऐसे गुट में भर्ती किया गया है, जो पाकिस्तान सरकार के समर्थन से अलगाववागी गुटों के खिलाफ लड़ रहा है। इनको बाकायदा एक सैलरी पाकिस्तानी सरकार देगी।
40,000 रुपए महीना में भर्ती
पाकिस्तान में रह रहे पूर्व अफगान सैनिक खान ने बताया कि वह कई ऐसे लोगों को जानते हैं, जो सरकार समर्थित सशस्त्र समूहों में शामिल हुए हैं। इसका नेतृत्व एक पूर्व अफगान पुलिस अधिकारी करता है। खान के अनुसार, भर्ती के बाद पूर्व अफगान सुरक्षा अधिकारियों और सैनिकों का परिचय उनके निर्धारित इलाकों के स्थानीय पुलिस स्टेशनों से कराया जाता है ताकि हथियार ले जाते हुए या पुलिस चौकियों पर पहचान के उन्हें कोई परेशानी ना हो।
खान के मुताबिक, भर्ती किए जा रहे सैनिकों को हर महीने 40,000 पाकिस्तानी रुपए (145 डॉलर) मिलते हैं। खुद उनको भी ये ऑफर कई बार मिला कि वह बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें। बलूचिस्तान पाकिस्तान का दक्षिण-पश्चिमी प्रांत है, जिसका बॉर्डर अफगानिस्तान और ईरान से लगता है। ऐसे में अफगानिस्तान में ट्रेनिंग लिए हुए पूर्व सैनिक पाकिस्तानी आर्मी के काफी काम आ सकते हैं।
पाकिस्तान में अशांति
पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत सुरक्षा के बिगड़ते संकट का सामना कर रहा है। बलूच अलगाववादी समूहों ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ कई वर्षों से विद्रोह छेड़ रखा है। इनमें एक सबसे अहम नाम बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) का है। इस गुट ने बार-बार पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर हमले किए हैं। BLA की मांग बलूचिस्तान को आजाद करने की है।
पाकिस्तानी तालिबान या तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने बलूचिस्तान के पश्तून-बहुल उत्तरी जिलों में पाक सुरक्षाबलों पर हमले किए हैं। इससे वह संघर्ष और बड़े इलाके में फैल गया है, जो पहले मुख्य रूप से पड़ोसी खैबर पख्तूनख्वा और अफगान सीमा के पास पाकिस्तान के पूर्व आदिवासी इलाकों तक सीमित था।



