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नई दिल्ली: तमाम राजनीतिक तनावों और वीजा संबंधी अड़चनों को पार करते हुए ईरान की फुटबॉल टीम आखिरकार मेक्सिको पहुंच गई है। आगामी फीफा वर्ल्ड कप शुरू होने में अब महज चार दिन बचे हैं। तुर्की के अंताल्या में कड़े प्रैक्टिस सेशन के बाद ईरानी टीम शनिवार को फ्लाइट से रवाना हुई और रविवार दोपहर मेक्सिको के तिजुआना शहर पहुंची। टीम ने सोशल मीडिया पर हाय मेक्सिको लिखकर अपनी तस्वीरें शेयर कीं जिसमें खिलाड़ी सफेद शर्ट और नीले ब्लेजर के मैचिंग सूट में नजर आ रहे हैं।

तनाव के बाद भी खेलने पर अड़ा रहा ईरान

इस साल फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद टीम के वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने पर काले बादल मंडरा रहे थे। यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ईरानी टीम के शामिल होने को अनुचित बताया था। हालांकि, ईरानी फुटबॉल एसोसिएशन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी और साफ किया था कि यह टूर्नामेंट फीफा का है न कि किसी एक देश का। इसी अडिग रुख के चलते टीम आज मैदान पर उतरने को तैयार है।

अमरीका ने काटे सपोर्ट स्टाफ के वीजा

ईरान की इस वर्ल्ड कप यात्रा में सबसे बड़ा रोड़ा वीजा को लेकर आया। शुरुआत में टीम को अमेरिकी राज्य एरिजोना में कैंप लगाना था लेकिन पाबंदियों के कारण उन्हें अपना प्लान बदलना पड़ा। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया था कि खिलाड़ियों का स्वागत है लेकिन उनके साथ आने वाले सैन्य पृष्ठभूमि या इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े लोगों को एंट्री नहीं दी जाएगी। इसी नीति के तहत अमेरिकी प्रशासन ने ईरान फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष और पूर्व IRGC कमांडर मेहदी ताज समेत करीब एक दर्जन कोच, ट्रेनर और मेडिकल स्टाफ के वीजा रिजेक्ट कर दिए।

मेक्सिको के राष्ट्रपति ने बढ़ाया मदद का हाथ

जब अमेरिकी पाबंदियों के कारण ईरानी टीम का अभ्यास सत्र अधर में लटक गया तब मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने खेल भावना दिखाते हुए मई में ईरान को अपने यहां मेजबानी की पेशकश की थी। इसी मदद की बदौलत टीम अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे सकी। इस बार वर्ल्ड कप की संयुक्त मेजबानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको मिलकर कर रहे हैं।

ग्रुप-जी में न्यूजीलैंड से होगा पहला मुकाबला

टूर्नामेंट में ग्रुप-जी का हिस्सा बनी ईरानी टीम अपने अभियान की शुरुआत 15 जून को कैलिफोर्निया के इंगलेवुड में न्यूजीलैंड के खिलाफ करेगी। इसके बाद टीम के अगले दो कड़े मुकाबले 21 जून को बेल्जियम और 26 जून को मिस्र के खिलाफ होने हैं। सीमित सपोर्ट स्टाफ और भारी राजनीतिक दबाव के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरानी खिलाड़ी मैदान पर कैसा प्रदर्शन करते हैं।