Spread the love

लंदन: स्वीडन की एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने दिल्ली में मजबूती से विरोध प्रदर्शन करने के लिए भारतीय छात्रों की तारीफ की है। लंदन के ट्रैफलगर स्क्वायर पर एसएफआई की रैली में शामिल होते हुए थनबर्ग ने कहा कि भारतीय युवाओं ने जिस एकजुटता से आंदोलन किया, उसने दुनियाभर के लोगों को उम्मीद दी है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के मंत्री पद से इस्तीफे पर खुशी जताई और भारत के प्रदर्शनकारी छात्रों को मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस आंदोलन ने आम लोगों की ताकत का असली मतलब बताया है।

पर्यावरण और मानवाधिकार पर अपनी लड़ाई के लिए पहचान रखने वाली ग्रेटा थनबर्ग ने कहा, ‘भारतीय छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने हम सभी को गर्व महसूस कराया है। उन्होंने हमें उम्मीद दी है। वे दिखाते हैं कि जब लोग एक साथ आते हैं और विरोध करते हैं तो हम क्या हासिल कर सकते हैं। वे जन-शक्ति का असली मतलब दिखाते हैं।’

‘हम भारतीय छात्रों के साथ’

ग्रेटा थनबर्ग उन कई लोगों में शामिल थीं, जो आंदोलन की जीत का जश्न मनाने के लिए SFI की ओर से लंदन में आयोजित वीकेंड की सभा में शामिल हुए थे। ग्रेटा ने कहा, ‘न्याय के लिए भारतीय छात्रों का संघर्ष और लोकतंत्र और आजादी के लिए व्यापक संघर्ष हमारा भी संघर्ष है। इसलिए हम सभी को अब एक साथ आना होगा और भारत के साथ एकजुटता दिखानी होगी।’

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की ब्रिटेन की यूनिट ने लंदन में जंतर-मंतर के प्रदर्शन के समर्थन में लगातार प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा गया और इस्तीफे के बाद जश्न भी मनाया गया। ग्रेटा विदेश के कई उन दूसरे कार्यकर्ताओं में शामिल थीं, जो इस प्रदर्शन को सही कर रहे हैं और सपोर्ट कर रहे हैं।

क्या है जंतर-मंतर प्रदर्शन का मामला

दिल्ली ने बीते एक महीने में भारी विरोध प्रदर्शन देखे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी छात्र संगठनों नेतृत्व में NEET पेपर लीक के मामले पर युवाओं ने प्रदर्शन किया है। इस प्रदर्शन पर दुनिया का ध्यान तब गया, जब 20 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों ने संसद की ओर मार्च किया, जिसे पुलिस ने बलपूर्वक रोका।

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन और हिंसा के बाद भारत के बड़े शहरों के साथ-साथ दुनियाभर के कई हिस्सों में इस मुद्दे पर लोग सड़कों पर उतर गए। एक महीने से ज्यादा के विरोध प्रदर्शन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की कि उन्होंने प्रधानमंत्री को शिक्षा मंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इसके बाद छात्र संगठनों ने सड़कों पर उतरकर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटी हैं।