नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ( UNGA ) के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पैसिफिक आइलैंड देशों (PIC) के कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें समोआ के उप-प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री; फिजी, मार्शल आइलैंड्स गणराज्य, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स और तुवालु के विदेश मंत्री; टोंगा साम्राज्य के वित्त मंत्री; फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया के न्याय विभाग के सचिव और अटॉर्नी जनरल; वानुअतु के स्वास्थ्य मंत्री; नौरू के उप-विदेश मंत्री; और पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के महासचिव शामिल थे।
इन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान, नेताओं ने FIPIC शिखर सम्मेलनों के नतीजों की समीक्षा की और भारत-FIPIC सहयोग में हुई प्रगति का स्वागत किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2023 में घोषित ’12-सूत्रीय कार्य योजना’ के तहत हुई प्रगति भी शामिल है। उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा), क्लाइमेट एक्शन (जलवायु कार्रवाई), आपदा से निपटने की क्षमता, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में और सहयोग पर चर्चा की। बैठक में क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर FIPIC की साझेदारी और सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया गया। सबसे महत्वपूर्ण चर्चा प्रशांत द्वीप समूह पर रही। जिसमें एस जयशंकर ने समझाया कि आखिर कैसे भारत मददगार साबित हो रहा है।
प्रशांत द्वीप समूह में भारत कैसे कर रहा मदद
- प्रशांत द्वीप समूह के क्षेत्र के प्रति भारत का नजरिया हमेशा से जरूरतों पर आधारित, विकास-केंद्रित और लोगों को प्राथमिकता देने वाला रहा है।
- भारत, ‘पैसिफिक आइलैंड फोरम’ की ‘ब्लू पैसिफिक कॉन्टिनेंट के लिए 2050 की रणनीति’ में बताई गई प्राथमिकताओं का पूरा सम्मान और समर्थन करता है।
- प्रशांत द्वीप समूह देशों में भारत की विकास परियोजनाएं आजीविका को मजबूत करने, क्षमता निर्माण और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने पर हमारे साझा फोकस को दर्शाती हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित एक्शन प्लान के तहत काफी प्रगति हुई है; इसमें हेल्थकेयर, रिन्यूएबल एनर्जी, कनेक्टिविटी, टेक्नोलॉजी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
- यह माना गया कि ‘अल नीनो’ पैसिफिक आइलैंड देशों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करता है और भारत इस घटना के बुरे असर को कम करने में मदद के लिए तैयार है।
- स्पेस, टिकाऊ तटीय और समुद्री रिसर्च में सहयोग के प्रयासों पर जोर दिया गया। सभी सदस्यों को ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ और ‘कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया; इनके तहत क्लाइमेट चेंज, रिन्यूएबल एनर्जी और टिकाऊ विकास से जुड़ी कई परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं।



