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नई दिल्ली: कभी सरकारी कंपनी रही हिंदुस्तान जिंक ने पिछले 24 साल में अपने निवेशकों को मालामाल किया है। यह चांदी का उत्पादन करने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनियों में शामिल है। सरकार ने 2002 में इस कंपनी में 26 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी जिसे अनिल अग्रवाल की कंपनी स्टरलाइट इंटस्ट्रीज ने खरीदा था। बाद में अनिल अग्रवाल की कंपनी ने इसे पूरी तरह खरीद लिया था। 2002 से इस कंपनी के शेयरों ने अपने निवेशकों को 1400 गुना रिटर्न दिया है। अगर आपने 24 साल पहले कंपनी में 1 लाख रुपये का निवेश किया होता तो आज उसकी वैल्यू 14 करोड़ रुपये होती।

कंपनी की चेयरमैन प्रिया अग्रवाल हेब्बार ने शेयरहोल्डर्स को भेजी एक चिट्ठी में कहा कि हिंदुस्तान जिंक ने सालाना करीब 33% के ग्रोथ रेट के साथ अपने निवेशकों को 1400 गुना से अधिक रिटर्न दिया है। सरकार ने 2002 में कंपनी में 26 फीसदी हिस्सेदारी 445 करोड़ रुपये में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को बेची थी। इसके बाद नवंबर, 2003 में 19 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी 324 करोड़ रुपये में बेची गई। हेब्बार ने कहा कि वैल्यू क्रिएशन का यह लेवल अनुशासित ऑपरेटिंग मॉडल का प्रतीक है जिसने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।