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मानव–वन्यजीव संघर्ष पर दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई में हाई कोर्ट ने मुआवजा वितरण में देरी और उससे पैदा हो रहे खतरों पर गंभीर चिंता जताई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने राज्य सरकार से 4 हफ्तों में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

याचिकाकर्ता ने बताया कि फसल और संपत्ति नुकसान के मामलों में मुआवजा प्रक्रिया इतनी धीमी है कि सिर्फ 17% किसानों को ही राहत मिल पाती है। मजबूरी में किसान खेतों की सुरक्षा के लिए हाई-टेंशन करंट वाले तार लगा रहे हैं, जिससे बाघों सहित कई वन्यजीवों की मौतें बढ़ रही हैं।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के आदेश का हवाला भी दिया गया, जिसमें मानव–वन्यजीव संघर्ष को प्राकृतिक आपदा घोषित कर 10 लाख रुपए मुआवजा निर्धारित करने की बात कही गई है।