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चंडीगढ़: पंजाब के मानसा जिले की बरेटा मंडी की एक छोटी सी वर्कशॉप में तैयार किए गए फावड़े 12 सितंबर को भारत मंडपम में हुए BRICS समारोह का हिस्सा बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत अन्य नेताओं ने वृक्षारोपण के दौरान इन्हीं फावड़ों से मिट्टी खोदी। इन फावड़ों को बरेटा मंडी के कारीगर गुरनाम सिंह ने तैयार किया था। उनके परिवार में फावड़े बनाने का हुनर तीन पीढ़ियों से चला आ रहा है। उनके पिता और दादा भी खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार बनाया करते थे।

कैसे मिला BRICS का ऑर्डर

गुरनाम ने भी लंबे समय तक यही काम किया, हालांकि अब उनका मुख्य कारोबार बदल चुका है। आज गुरनाम की वर्कशॉप में लकड़ी और पीतल से हाथ से तैयार की गई वॉकिंग स्टिक बनाई जाती हैं। इनमें ग्राहकों की पसंद के मुताबिक खास डिजाइन वाली छड़ियां भी शामिल हैं। गुरनाम के मुताबिक, BRICS के लिए फावड़े बनाने का ऑर्डर उनके परिवार के पुराने काम की तरफ लौटने जैसा था। गुरनाम के 23 वर्षीय बेटे जतिन ने बताया कि परिवार की बनाई एक वॉकिंग स्टिक दिल्ली में किसी व्यक्ति को उपहार में दी गई थी। इसी के जरिए BRICS समारोह की तैयारी कर रही टीम तक परिवार के काम की जानकारी पहुंची। इसके बाद परिवार से पहले दो फावड़ों के नमूने तैयार करने को कहा गया।

सैंपल पसंद आने के बाद मिला ऑर्डर, कितनी थी कीमत

सैंपल पसंद आने के बाद 8 सितंबर तक 11 फावड़े तैयार करके देने की जिम्मेदारी मिली। समय बेहद कम था। जतिन के मुताबिक, परिवार ने तीन-चार दिनों में ही सभी फावड़े तैयार कर दिए। इसके कुछ ही दिनों बाद ये फावड़े बरेटा मंडी से दिल्ली पहुंच गए। 12 सितंबर को BRICS नेताओं के वृक्षारोपण कार्यक्रम में इनका इस्तेमाल हुआ। परिवार ने BRICS के 11 फावड़ों के लिए मिली कुल रकम बताने से इनकार किया है। हालांकि उनका कहना है कि सामान्य फावड़े की कीमत करीब 2,000 रुपये होती है। BRICS के लिए तैयार किए गए फावड़ों में अतिरिक्त मोल्डिंग, सजावट और लकड़ी का काम किया गया था, इसलिए उनकी लागत सामान्य फावड़े से ज्यादा थी।

खेती के औजारों से पुराना नाता

बरेटा मंडी में खेती के औजार और कृषि मशीनरी से जुड़ी छोटी वर्कशॉप लंबे समय से काम करती रही हैं। इसी माहौल में गुरनाम का परिवार भी आगे बढ़ा। किसानों की जरूरत के मुताबिक औजार बनाना और उनकी मरम्मत करना परिवार के पारंपरिक काम का हिस्सा रहा है। पंजाब में रामगढ़िया परिवारों की पहचान भी कारीगरी से जुड़ी रही है। लकड़ी, धातु और बढ़ईगीरी के काम में उनकी पारंपरिक विशेषज्ञता रही है। इसी हुनर से कई परिवारों ने कृषि उपकरण तैयार करने का काम अपनाया। गुरनाम के लिए फावड़ा बनाना कोई नया या असाधारण काम नहीं था। वह इसे वर्षों से बनाते आए हैं। हालांकि समय के साथ परिवार ने अपना कारोबार वॉकिंग स्टिक की ओर मोड़ लिया।

सोशल मीडिया ने बदल दिया कारोबार

परिवार के नए कारोबार को बढ़ाने में सोशल मीडिया की भी अहम भूमिका रही। जतिन ने इस साल जनवरी में इंस्टाग्राम पर परिवार के उत्पादों को प्रदर्शित करना शुरू किया। ‘GS Agriculture Fabrication Works’ के पेज से अब करीब 29 हजार लोग जुड़े हैं। परिवार के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से ग्राहक संपर्क कर रहे हैं। विदेशों से भी ऑर्डर मिलने का दावा परिवार ने किया है। गुरनाम कहते हैं कि पहले ऑर्डर सीमित थे, लेकिन सोशल मीडिया के बाद कारोबार को नए ग्राहक मिले।