अजाक्स के नव निर्वाचित अध्यक्ष और आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव जल्दी ही मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मिलेंगे। उधर अजाक्स अध्यक्ष के ब्राह्मणों की बेटियों को लेकर दिए बयान पर अब तक सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ ने सरकारी की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संघ ने कहा है कि अजाक्स को लाड़ला बनाकर काम कर रही सरकार बेखौफ होकर बहन बेटियों के बारे में गंदी बयानबाजी करने का दुस्साहस करने की छूट दे रही है। दूसरी ओर ब्राह्मण समाज के आह्वान पर गुरुवार को रोशनपुरा चौराहे पर बड़ा प्रदर्शन करने की भी तैयारी है।
सोशल मीडिया पर पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का एक बयान सामने आया है। उन्होंने वर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मिलने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि जो अधिकारी चरित्रहीन हैं और उसके विरुद्ध महिलाओं के साथ यौन शोषण भी करने की जानकारी मिली है। ऐसे अधिकारी को आईएएस अवॉर्ड मिल गया। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मिलकर आग्रह करेंगे कि हमारी व्यवस्था में ही खोट है कि जज के फर्जी हस्ताक्षर करने वाला कैसे आईएएस बन गया। उसका आईएएस अवाॅर्ड वापस होना चाहिए। वह ऐसे बयान से सरकार को लज्जित कर रहा है। सकल समाज को लज्जित कर रहा है। यह देश की एकता के खिलाफ षड्यंत्र है। इसे सरकार और देश पहचाने। ऐसा अधिकारी मनोरोगी है।
सरकारों का लाड़ला संगठन रहा है, इसलिए बिगड़ रहा मामला दूसरी ओर मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा है कि अजाक्स अन्य कर्मचारी संगठनों की तरह एक कर्मचारी संगठन है लेकिन सरकारों ने अजाक्स संगठन को अन्य कर्मचारी संगठनों की तुलना में ज्यादा लाड़ प्यार दिया। उसे वीआईपी माना। इसी लाड़-प्यार की परिणति है कि अजाक्स का प्रांताध्यक्ष ने निर्वाचित होने के चंद मिनट बाद ही बिल्कुल बेखौफ होकर बहन बेटियों के बारे में गंदी बयानबाजी करने का दुस्साहस किया। नायक ने कहा कि अजाक्स का जब गठन हुआ था तब आईएएस अध्यक्ष नहीं होते थे। बाद में आईएएस अध्यक्ष बनने लगे तब भी शासन की ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई। अन्य संगठनों में छोटे कर्मचारी अध्यक्ष होते हैं और अजाक्स में आईएएस अधिकारी हैं। आईएएस अधिकारी अपने पद और पावर का इस्तेमाल अजाक्स के एजेंडे के लिए करते हैं। अन्य कर्मचारी संगठन पीछे रह जाते हैं। इसकी शिकायत भी शासन से की गई थी परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। अजाक्स संगठन को दिये गये इस अति लाड़ ने ही उनके पदाधिकारियों को दुस्साहसी बना दिया है।



