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भोपाल। स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले विभाग के 30 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अपनी मांगों को लेकर नौ फरवरी से चरणबद्ध आंदोलन करेगा।

इसमें मेडिकल कॉलेजों से लेकर गांव के उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक में कार्यरत वे कर्मचारी शामिल हैं, जो वर्षों से स्थायी प्रकृति का काम कर रहे हैं, लेकिन आज भी न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा के लिए तरस रहे हैं।

संघ का आरोप है कि शासन किसी पद के लिए 20 से 25 हजार रुपये स्वीकृत करता है, लेकिन ठेकेदारी प्रथा और प्रशासनिक कटौती के चलते कर्मचारी के हाथ में मात्र 8 से 12 हजार रुपये ही आते हैं। बढ़ती महंगाई के बीच जहां नियमित कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ता है, वहीं इन आउटसोर्स कर्मियों का मानदेय बरसों से जस का तस बना हुआ है।