नई दिल्ली: सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने मक्का की तरफ बढ़ रहे एक हूती ड्रोन को मार गिराया है। हृतियों ने हालांकि इससे इनकार किया है, पर इस घटना ने मौजूदा संघर्ष को बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला दिया है। मक्का और मदीना दुनियाभर के मुस्लिमों के लिए सबसे पवित्र शहर होने के साथ ही ऐतिहासिक धरोहरें भी हैं। इन पर किसी भी तरह का खतरा हतियों और सऊदी अरब के बीच के टकराव को क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
भारत ने रखा अपना पक्ष
इस घटना को लेकर आ रहीं प्रतिक्रियाएं बताती है कि मामला कितना संवेदनशील है। सऊदी अरब ने इसे रेड लाइन बताया है। भारत ने भी इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि ऐसी कोई कार्रवाई स्वीकार नहीं होगी जिससे आम लोगों के जीवन और बुनियाद ढांचे को खतरा पैदा हो। चूंकि हृतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है, इसलिए इस घटना की जांच जरूरी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान भी ऐसी परिस्थितियां बन चुकी हैं। तब मिलिट्री बेस डिएगो गार्सिया और खाड़ी देशों पर हुए कुछ हमलों से तेहरान ने इनकार किया था।
हूती-सऊदी टकराव
जिम्मेदारी की जरूरत । इस पूरे रीजन में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो संघर्ष को भड़काए रखना चाहती हैं। ऐसे में किसी भी तरह के गलत आकलन का परिणाम भयावह हो सकता है। इस टकराव ने ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए पहले ही परेशानी बढ़ा रखी है। होमुंज स्ट्रेट पर गतिरोध अभी तक दूर नहीं हुआ है, जबकि दूसरे अहम समुद्री मार्ग बाब-अल-मंदेब के आसपास हृतियों का नियंत्रण कड़ा होता जा रहा है।
मानवीय संकट। क्रूड की सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ा
है। इसी के चलते कच्चे तेल का भाव सौ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। अगर सऊदी पर हमले बढ़ते हैं या हुतियों की पकड़ मजबूत होती है, तो समस्या और भी विकट हो जाएगी। इसका दूसरा पहलू मानवीय संकट से जुड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, यमन में लड़ाई छिड़ने के बाद से एक लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। एक बड़ी आबादी को तुरंत भोजन, पानी और दूसरी बुनियादी चीजों की जरूरत है।
बातचीत के प्रयास। हर युद्ध की कीमत आखिरकार जनता
को ही चुकानी पड़ती है। अमेरिका-इस्राइल और ईरान का मसला साढ़े 6 महीने बाद भी अनसुलझा है। ऐसे में दुनिया हुती-सऊदी टकराव को उस स्थिति तक नहीं पहुंचने दे सकती, जहां मामला अनियंत्रित हो जाए। यह अच्छा है कि विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी है। ईरान के विदेश मंत्री की चीन यात्रा और कतर की मध्यस्थता की कोशिशें महत्वपूर्ण हैं।



