नई दिल्ली: तमिलनाड बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भले ही पार्टी छोड़कर अलग राजनीतिक रास्ता अपना लिया है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति उनका सम्मान और समर्पण जरा भी कम नहीं हुआ है। उनके पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं देने के तरीके से यह बात और साफ हो जाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर, 2026 को 76 साल के हुए तो उन्हें बधाई देने वालों का दुनिया भर से तांता लगा हुआ है। लेकिन, इन सब में पूर्व आईपीएस के अन्नामलाई का बधाई संदेश कुछ अलग हटकर है। क्योंकि, इस साल तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने जिस तरह से बीजेपी छोड़ी, उसको लेकर वह खुद भी सहज नहीं थे और न ही पार्टी इसे हजम करने के लिए तैयार थी।
आप लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं- के अन्नामलाई
के अन्नामलाई ने एक्स पर अपने पोस्ट के माध्यम से पीएम मोदी को जन्मदिन पर जो बधाई संदेश दिया है, उसमें उन्होंने लिखा है, ‘हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।’
तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं अन्नामलाई
- तेज-तर्रार आईपीएस अफसर के रूप में बहुत ही कम समय में खुद की ‘सिंघम’वाली पहचान बनाने वाले के अन्नामलाई ने बहुत ही कम उम्र में नौकरी छोड़ने के बाद 2020 में बीजेपी का कमल थाम लिया।
- एक साल में ही पार्टी में उन्होंने अपना ऐसा जलवा बनाया कि 2021 में तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष बन गए।
- उनके इस पद पर रहते बहुत ही कम समय में बीजेपी का नाम तमिलनाडु के घर-घर तक पहुंच गया।
- उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में अबतक का सबसे बेहतर प्रदर्शन करके दिखाया। 2019 के 3.7 फीसदी के मुकाबले पार्टी का वोट शेयर 11.4 फीसदी तक पहुंच गया।
- इस प्रदर्शन के पीछे अन्नामाई की तमिलनाडु भर की ऐतिहासिक पदयात्रा का बड़ा रोल माना गया।
अन्नामलाई ने क्यों छोड़ दी बीजेपी
- अन्नामलाई बहुत ही तेजी से तमिलनाडु में भ्रष्टाचार के खिलाफ मसीहा बनकर उभरने लगे थे और 2024 लोकसभा चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन इसका बड़ा प्रमाण है।
- भ्रष्टाचार के मुद्दे की वजह से ही वह बीजेपी और एआईएडीएमके के बीच फिर से गठबंधन के सख्त विरोधी रहे। लेकिन, पार्टी ने विधानसभा चुनावों में अपनी पूर्व सहयोगी से हाथ मिला लिया और यहीं से अन्नामलाई अपना अलग रास्ता अपनाने की सोचने पर मजबूर होने लगे।
- हालांकि, उन्होंने विधानसभा चुनावों तक पार्टी के समर्पित सिपाही की तरह काम किया, लेकिन परिणाम आते ही उन्होंने अलग सियासी रास्ते की तलाश शुरू कर दी।
- उन्होंने जिस तरह से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भरोसे में लेकर बिना किसी विवाद और बवाल के पार्टी छोड़ी, वह भारतीय राजनीति के लिए एक मिसाल बन चुका है।



