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पेरिस: फ्रांस की राजधानी पेरिस में विवाद के पास मशहूर एफिल टावर को फिलहाल पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। एफिल टावर को बंद करने का फैसला कर्मचारियों के हड़ताल करने के बाद लिया गया है। दरअसल पेरिस के एफिल टॉवर के कर्मचारियों ने इस आरोप पर हड़ताल कर दी है कि कुछ दिन पहले एक हिंदू धार्मिक समूह के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को वहां से ‘हटा’ दिया गया था। यह बात कर्मचारियों और मैनेजमेंट ने बताई है।

ये पूरा विवाद पिछले हफ्ते BAPS (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) से जुड़े लगभग 100 लोगों के एक दल के निजी दौरे से शुरू हुआ। इस धार्मिक समूह के प्रतिनिधि पेरिस के बाहरी इलाके में एक मंदिर के उद्घाटन से जुड़े समारोहों के लिए फ्रांस पहुंचा था। आरोप है कि इस दौरान एफिल टावर मैनेजमेंट से कहा गया था कि कुछ समय के लिए महिला कर्मचारियों को वहां से हटा दिया जाए और उन्होंने ऐसा ही किया। इसके बाद धीरे धीरे विवाद बढ़ा और अब कर्मचारियों ने इस बात के लिए हड़ताल कर दिया है।

राष्ट्रपति उम्मीदवार गेब्रियल अटाल का सख्त बयान

फ्रांस के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गेब्रियल अटाल ने एक बयान में कहा है ‘फ्रांस में महिलाओं को उनकी जगह के बारे में कोई संस्कृति, कोई मान्यता, कोई पूजा-पद्धति या कोई भी व्यक्ति कुछ नहीं बता सकता या हुक्म नहीं चला सकता।’ इसके अलावा एफिल टॉवर के कर्मचारियों ने उन प्रोफेशनल निर्देशों की निंदा की है जिनकी वजह से दल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को किनारे कर दिया गया और उनकी जगह दूसरे लोगों को काम पर लगा दिया गया। फ्रांस में इसे लिंग भेद का मामला बताया जा रहा है।

उनके अलावा पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने इस घटना को अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्मारकों के नीचे महिला-पुरुषों की समानता खत्म नहीं हो सकती। जबकि फ्रांस की समानता मंत्री ओरोर बर्गे ने कहा ‘फ्रांस में हम महिलाओं को खुद को छिपाने या मिटाने के लिए नहीं कहते। गणतंत्र के कानूनों से ऊपर कोई धर्म या विचार नहीं है।’

एफिल टावर प्रबंधन और BAPS का क्या कहना है?

एफिल टावर का मैनेजमेंट संभालने वाली कंपनी SETE ने स्वीकार किया है कि प्रतिनिधिमंडल की तरफ से ‘महिलाओं के साथ बातचीत को सीमित करने’ का अनुरोध किया गया था। कंपनी ने माना कि उनसे गलती हुई और ऐसी शर्तें स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थीं क्योंकि यह लैंगिक समानता और उनके मूल्यों के खिलाफ है। प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों से इसके लिए माफी भी मांगी है।

वहीं इस विवाद पर BAPS संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि उनके संज्ञान में किसी को भी एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया था। उन्होंने यह भी कहा कि दल बड़ा होने के कारण सामान्य समय से पहले ही दौरे का तालमेल किया गया था ताकि आम लोगों को असुविधा न हो। हालांकि संगठन ने कहा कि वे चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं और इस स्थिति से जिसे भी ठेस पहुंची या असुविधा हुई उसके लिए वे ईमानदारी से माफी मांगते हैं।

BAPS डेलीगेशन के दौरे पर शुरू हुआ ये पूरा विवाद क्या है?

शनिवार को हिंदू आध्यात्मिक संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) से जुड़े करीब 100 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल एक निजी दौरे पर एफिल टावर पहुंचा था। यह समूह फ्रांस में अपने नए मंदिर के उद्घाटन समारोह के सिलसिले में वहां गया था। एफिल टावर के कर्मचारी संघ की प्रतिनिधि डियान दावोआन के मुताबिक जब यह प्रतिनिधिमंडल वहां से गुजर रहा था तब महिला कर्मचारियों को उनके काम की जगह से हटने या दूसरी जगहों पर जाने के लिए कहा गया।

कुछ मुख्य जगहों पर महिला कर्मचारियों की जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया। साथ ही महिलाओं को निर्देश दिए गए कि जब तक यह दल वहां मौजूद है वे तय रास्तों या इलाकों में न जाएं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें इस लैंगिक भेदभाव से गहरा धक्का लगा। इसके विरोध में और भविष्य में ऐसा दोबारा न होने की मांग को लेकर सोमवार को कर्मचारियों ने काम रोक दिया और हड़ताल पर चले गए हैं।