Spread the love

कोलंबो: पुरातत्वविदों ने श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र में द्वीपों पर इंसानी बसावट के सबसे शुरुआती सबूतों की पहचान की है, जो अब तक चली आ रही धारणाओं को बदल सकते हैं। वेलनाई द्वीप पर ऑर्कियोलॉजिस्ट को प्रागैतिहासिक काल में बसावट के सबूत मिले हैं, जो लगभग 25000 साल पुराने हो सकते हैं। लंबे समय से माना जाता रहा है कि पत्थर के संसाधनों की कमी और अर्ध-शुष्क परिृदृश्य के कारण यह क्षेत्र इंसानी बसावट के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन हालिया स्टडी के निष्कर्ष इस पुरानी धारणा को चुनौती देते हैं।

रामायण काल से पहले के भी सबूत

उत्तरी श्रीलंका के वेलनाई द्वीप में मिले सबूत लगभग 25000 साल पहले के माने जाते हैं। अगर ऐसा है, तो ये कालक्रम रामायण काल की श्रीलंका से भी पुराना हो सकता है। हालांकि, श्रीलंका के नम दक्षिणी क्षेत्रों में 5300 और 3400 ईसा पूर्व के आस-पास सीपियों के ढेर वाली बसावट के कई सबूत मिलते हैं, लेकिन उत्तरी श्रीलंका में ऐसी बसावट की कमी है।

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि अर्ध-शुष्क परिदृश्य, ताजे पानी के संसाधनों की कमी, पत्थर जैसे कच्चे माल का अभाव और सीमित वनस्पति के कारण उत्तरी श्रीलंका का क्षेत्र इंसानों के रहने के लिए उपयुक्त नहीं था। यह स्थिति तब तक बनी रही, जब तक 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में भारत से कृषि और पशुपालन करने वाले लोग वहां नहीं पहुंचे।

उत्तरी श्रीलंका में सबसे पुरानी मानव बस्ती

उत्तरी श्रीलंका के जाफना प्रायद्वीप में स्थित वेलनाई द्वीप पर पुरातत्वविदों को एक विशाल शंख-स्तंभ मिला है। इसका सबसे पुराना समुद्री जमाव 6300 से 5970 ईसा पूर्व का है। यहां सबसे पुरानी मानव बस्ती लगभग 3460 ईसा पूर्व की है, जो इसे उत्तरी श्रीलंका में वैज्ञानिक रूप से सबसे पुरानी प्रागैतिहासिक बस्ती बनाती है।

जर्नल ऑफ आइलैंड एंड कोस्टल आर्कियोलॉजी में प्रकाशित स्टडी के नतीजे दक्षिणी श्रीलंका के शंख गुच्छों में देखे गए पैटर्न के समान हैं। स्टडी के मुख्य लेखक डॉ. थिलंका सिरिवर्धना ने बताया कि ये निष्कर्ष बताते हैं कि दक्षिणी और उत्तरी श्रीलंका के बीच बसावट में ये अंतर आवास संबंधी उपयुक्तता के बजाय संरक्षण संबंधी पूर्वाग्रह के कारण है।सिरिवर्धना ने कहा, होलोसीन काल में समुद्र का स्तर बढ़ने के साथ ये भूभाग धीरे-धीरे जलमग्न हो गए, जिससे प्राचीन स्थल पुरातात्विक अभिलेखों से पूरी तरह लुप्त हो गए। उन्होंने आगे कहा कि वेलनाई में जो हम कुछ देखते हैं, वह संभवतः जलमग्न होने के साथ बसी बस्तियों का प्रतिनिधित्व करता है, न कि इस क्षेत्र में मानव बस्ती के प्रारंभिक चरणों का।

रामायण काल में श्रीलंका

श्रीलंका का उल्लेख भारतीय महाकाव्य रामायण में भी मिलता है, जिसमें राम और रावण के बीच युद्ध का विस्तार से वर्णन है। इतिहासकार इस ग्रंथ के रचनाकाल को लगभग 5000 साल पुराना मानते हैं। हालांकि, कुछ इसकी भाषा के आधार पर इसे 2000 साल पहले लिखा हुआ बताते हैं। इस ग्रंथ में श्रीलंका की जो भौगोलिक स्थिति बताई गई है और वर्तमान में भारत के दक्षिण में स्थिति द्वीपीय देश से मेल खाती है।