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भोपाल। अशोकनगर जिले के चंदेरी में चार युवाओं से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 9.80 लाख रुपये और मूल दस्तावेज ठगने के मामले में गिरफ्तार 30 वर्षीय तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई को सोमवार को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

वहीं तृप्ति के चचेरो भाई प्रखर और ड्राइवर को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

चारों आरोपियों को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट शरद जायसवाल की अदालत में पेश किया गया था। पुलिस ने चारों की रिमांड मांगी थी। सुनवाई के दौरान तृप्ति के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि तृप्ति और उसके भाई से पहले ही पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ की जा चुकी है। ऐसे में उन्हें दोबारा पुलिस रिमांड पर भेजने की जरूरत नहीं है।
अदालत ने तर्क को स्वीकार करते हुए दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जबकि प्रखर और ड्राइवर से पूछताछ के लिए चार दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की गई।

फर्जी आईडी से लेकर नियुक्ति पत्र तक

तृप्ति पर खुद को आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की अतिरिक्त निदेशक बताकर लोगों को सरकारी नौकरी और पर्यटन संपत्तियों की लीज दिलाने के नाम पर ठगी करने का आरोप है।
जांच में पुलिस को उसके पास से फर्जी सीबीआई आईडी कार्ड, भारत सरकार लिखी कार, जाली दस्तावेज और मसूरी में ट्राफी के साथ खिंचवाई गईं फर्जी तस्वीरें मिली हैं।

एआई टूल्स की जांच पर फोकस

पुलिस को आशंका है कि तृप्ति ने अपना रसूख कायम करने और अधिकारियों व लोगों को प्रभावित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और फोटो एडिटिंग टूल का इस्तेमाल किया।
पूछताछ में सामने आया कि वह एआई की मदद से सरकारी नौकरी के फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करती थी। इसके बाद डिजिटल फाइलों को डिलीट कर देती थी।